2+2 बातचीत के लिए भारत पहुंचे अमेरिका के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री, कई अहम समझौते को मिलेगा अंतिम रूप

नई दिल्‍ली। भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित 2+2 बातचीत होने वाली है। दोनों देशों के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री अगले दो दिन रिश्‍तों में गर्मजेाशी के बीच कई अहम समझौतों को अंतिम रूप देंगे। अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्‍पर और विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो सोमवार दोपहर भारत पहुंच गए। अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव से ठीक पहले दोनों मंत्रियों की दक्षिण एशियाई देशों की यह यात्रा बेहद महत्‍वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों की विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक होंगे। भारत को इस 2+2 बातचीत से काफी उम्‍मीदें हैं।
आखिर क्‍या है 2+2 वार्ता?
दो देशों के शीर्ष दो मंत्रियों के बीच होने वाली बैठकें टू प्लस टू मीटिंग्‍स कहलाती हैं। जापान से निकला बातचीत का यह तरीका कई देशों ने अपनाया है। इसका मकसद दो देशों के बीच रक्षा सहयोग के लिए उच्च स्तरीय राजनयिक और राजनीतिक बातचीत को सुविधाजनक बनाना है। भारत और अमेरिका के बीच 2+2 वार्ता की घोषणा 2017 में हुई थी। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप पहली बार मिले थे। सितंबर 2018 में भारत-अमेरिका के बीच पहली 2+2 वार्ता हुई जबकि दिसंबर 2019 में दूसरी बार।
भारत के लिए क्‍यों अहम है ये बातचीत?
चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच भारत को अमेरिका का साथ मिला है। इस रिश्‍ते को और मजबूत करने के लिए यह मीटिंग हो रही है। बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा और सहमति बन सकती है। भारत और अमेरिका के बीच कुछ ऐतिहासिक समझौते भी हो सकते हैं। इस मुलाकात में जिन बातों पर सबकी नजरें रहेंगी, वे कुछ इस प्रकार हैं:
BECA समझौता: 2+2 मीटिंग में बेसिक एक्‍सचेंज ऐंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट फॉर जियोस्‍पेशियल कोऑपरेशन (BECA) पर हस्‍ताक्षर हो सकते हैं। BECA का मकसद नॉटिकल और एयरोनॉटिकल चार्ट्स समेत जियोस्‍पेशियल डेटा की साझेदारी है। अमेरिका के सटीक सैटेलाइट्स के डेटा से मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाने के साथ-साथ नेविगेशन में भी मदद मिलेगी। भारत को उसे मिलिट्री ग्रेड डेटा का एक्‍सेस मिलेगा जिसकी मदद से टारगेट को सटीकता के साथ लोकेट किया जा सकता है।
भारत-चीन सीमा विवाद: यह मुद्दा प्रमुखता से बैठक में उठेगा। भारत ने हालिया दिनों में साफ कर दिया है कि चीन को उसकी शर्तों के साथ बॉर्डर से पीछे हटना होगा। अमेरिका इस पूरे विवाद में अबतक भारत का साथ देता आया है। ताजा घटनाक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच बैक चैनल से डील हो सकती है।
रक्षा खरीद: भारत ने हाल ही में अमेरिका से कई ऐडवांस्‍ड हथियार खरीदे हैं। इसके अलावा बॉर्डर पर तनाव को देखते हुए और रक्षा उपकरणों की तत्‍काल खरीद होनी है। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत में कई रक्षा सौदों पर सहमति बन सकती है।
चीन का समुद्री कब्‍जा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी पर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत होगी। दक्षिण चीन सागर में भी जिस तरह चीन ने अपना कब्‍जा जमाने की कोशिश की है, उसपर भी बात हो सकती है।
कोरोना पर चर्चा: अमेरिका और भारत, दोनों कोरोना वायरस से सबसे ज्‍यादा प्रभावित देश हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच इसे लेकर सहयोग बढ़ाने और मिलकर महामारी का मुकाबला करने पर कोई डील हो सकती है। वैक्‍सीन को लेकर भी दोनों देश कोई समझौता कर सकते हैं।
इंडो-पैसिफिक में सहयोग: यह भी 2+2 बातचीत का अहम हिस्‍सा होगा। पॉम्पियो ने भारत रवाना होने से पहले भी कहा था कि वे ‘स्वतंत्र, मजबूत और समृद्ध राष्ट्रों से बने Indo Pacific क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए’ आ रहे हैं।
H-1B वीजा: यह मुद्दा भारत के लिए बेहद अहम है। इस महीने ट्रंप प्रशासन ने H-1B visa को लेकर नियम बदले हैं। जिससे अमेरिकन वर्कर्स को रोजगार का ज्यादा मौका मिलेगा और इमिग्रेशन पर लगाम लगेगी। इसका सीधा असर भारतीय टेक प्रफेशनल्स को होगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर की तरफ से यह मुद्दा एस्‍पर के सामने रखा जा सकता है और कोई ठोक आश्‍वासन मिल सकता है।
WHO की भूमिका: कोरोना महामारी की वजह से WHO की साख को खासा बट्टा लगा है। अमेरिका ने तो WHO की फंडिंग ही रोक रखी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कोरोना पर चर्चा के दौरान WHO फंडिंग का मसला उठ सकता है। इसके अलावा, अमेरिका ने जिस तरह से WHO के खिलाफ मोर्चा खोला है, वह भारत से समर्थन मांग सकता है।
संयुक्‍त राष्‍ट्र: यूएन की उपयोगिता कितनी रह गई है, इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सवाल उठा चुके हैं। उन्‍होंने बदलती दुनिया के हिसाब से यूएन में बदलाव की वकालत की थी। सुरक्षा परिषद के स्‍थायी सदस्‍यों में भारत को शामिल करने पर चर्चा हो सकती है।
आतंकवाद: दोनों देश आतंकवाद के शिकार रहे हैं। पाकिस्‍तान समर्थ‍ित आतंकवाद को लेकर भारत नए सबूत अमेरिका के सामने रख सकता है। इसके अलावा, भारत की ओर से अमेरिका को पाकिस्‍तान पर आतंकियों के खिलाफ एक्‍शन का दबाव बनाने के लिए भी कहा जा सकता है।
एशिया में पावर मैनेजमेंट: एशिया के भीतर भारत के बढ़ते दबदबे को अमेरिका भी स्‍वीकार करता है। चीन ने जिस तरह ग्‍लोबल सुपरपावर बनने की महत्‍वाकांक्षा में कदम बढ़ाए हैं, उससे अमेरिका के कान खड़े हो गए हैं। चीन को रूस का समर्थन है, ऐसे में भारत को साध कर अमेरिका उसे खारिज कर देना चाहता है। 2+2 बातचीत में एशिया के नए समीकरणों पर विस्‍तार से बात हो सकती है।
-एजेंसियां

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