भारत और रूस के बीच S-400 डील फाइनल होते ही अमेरिका के तेवर ढीले हुए

नई दिल्ली। अमेरिका भले ही रूस से रिश्तों को लेकर दुनियाभर के देशों को धमकियां देता हो पर शुक्रवार को भारत के बहुचर्चित S-400 डील फाइनल करने के बाद उसके सुर बदल गए। अमेरिका ने अपने तेवर नरम करते हुए कहा कि उसकी ओर से लगाए जाने वाले प्रतिबंध दरअसल, रूस को दंडित करने के लिए है। अमेरिकी दूतावास ने साफ कहा कि US प्रतिबंधों का मकसद हमारे सहयोगी देशों की सैन्य क्षमताओं को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं हैं।
आपको बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस समय भारत दौरे पर हैं। शुक्रवार को भारत ने अमेरिका की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए रूस के साथ बहुप्रतीक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम डील फाइनल कर दी। माना जा रहा था कि डील फाइनल होने के बाद अमेरिका की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आ सकती है, लेकिन अमेरिकी दूतावास ने इस पर पहली प्रतिक्रिया देते हुए बिल्कुल कूटनीतिक बयान दिया है। भारत और रूस के बीच शुक्रवार को स्पेस सहयोग समेत 8 बड़े समझौते भी हुए हैं।
क्या है S-400 डील
यह एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट को आसमान से गिरा सकता है। S-400 को रूस का सबसे अडवांस लॉन्ग रेंज सर्फेस-टु-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम रूस के ही S-300 का अपग्रेडेड वर्जन है। इस मिसाइल सिस्टम को अल्माज-आंते ने तैयार किया है, जो रूस में 2007 के बाद से ही सेवा में है। यह एक ही राउंड में 36 वार करने में सक्षम है।
-एजेंसियां

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