अमरीकी राजदूत निकी हेली ने कहा, पाकिस्तान को एक डॉलर भी नहीं देना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की राजदूत निकी हेली ने कहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना जब तक ख़त्म नहीं कर देता है तब तक उसे एक डॉलर भी नहीं देना चाहिए.
हेली ने कहा कि पाकिस्तान अब भी आतंकियों को पनाह दे रहा है और अमरीकी सैनिक मारे जा रहे हैं.
निकी हेली पहली अमरीकी भारतीय हैं, जिन्हें अमरीका की किसी भी सरकार में कैबिनेट रैंक मिला हुआ है. उन्होंने कहा कि जो अमरीका को नुक़सान पहुंचा रहे हैं, उन्हें किसी भी सूरत में अमरीकी मदद नहीं मिलनी चाहिए.
निकी हेली ने अमरीकी पत्रिका द अटलांटिक को दिए इंटरव्यू में कहा है, ”यह एक रणनीतिक मामला है कि कौन देश साझेदार है और किसी देश के साथ किन मुद्दों पर काम करना है. हम इसी हिसाब से आगे बढ़ सकते हैं. मुझे लगता है कि हम बिना नतीजों का आकलन किए पैसे देना जारी रखते हैं. हमने ऐसा लंबे समय से किया है.”
हेली ने इस इंटरव्यू में कहा है, ”मिसाल के तौर पर पाकिस्तान को देख सकते हैं. हमने पाकिस्तान को अरबों डॉलर दिए, लेकिन उसने आतंकियों को पनाह देना बंद नहीं किया और हमारे सैनिक इस वजह से मारे गए. जब तक वो इन चीज़ों को ठीक नहीं कर लेता है तब तक हमें एक डॉलर भी उसे नहीं देना चाहिए. हमने अरबों डॉलर दिए लेकिन इस रक़म को उसने चीज़ों को बदलने में नहीं लगाया.”
इस साल के अंत तक निकी हेली यूएन में अमरीकी राजदूत के पद से इस्तीफ़ा दे देंगी. सितंबर महीने में अमरीका ने पाकिस्तान को मिलने वाली 30 करोड़ डॉलर की मदद को रद्द कर दिया था. अमरीका का कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकवादियों के ख़िलाफ़ ठोस काम नहीं किया है.
पिछले महीने ट्रंप ने पाकिस्तान को मिलने वाली अमरीकी मदद को रोकने का बचाव किया था. ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान ने अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन की मदद की थी. अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि पाकिस्तान सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना रहा.
ट्रंप ने ट्वीट कर कहा था, “अमरीका ने पिछले 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दी और उसने बदले में झूठ और छल के सिवाय कुछ नहीं दिया. वह सोचता है कि अमरीकी नेता मूर्ख हैं. हम अफ़ग़ानिस्तान में जिन आतंकवादियों को तलाश रहे हैं, उन्होंने उन्हें पनाह दी. अब और नहीं.”
ट्रंप का यह ट्वीट इसलिए भी पाकिस्तान के लिए एक कड़ी चेतावनी है क्योंकि हाल ही में अमरीकी उपराष्ट्रपति ने काबुल में कहा था कि अमरीका ने पाकिस्तान को नोटिस पर रखा है.
दूसरी ओर अमरीका के आरोपों को पाकिस्तान ख़ारिज करता रहा है. पिछले हफ़्ते वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में इमरान ख़ान अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों पर भी कई चीज़ें कही हैं. इमरान ख़ान ने कहा है कि वो अमरीका से बराबरी के आधार पर संबंध रखना चाहते हैं.
इमरान ख़ान ने इस इंटरव्यू में कहा है, “सुपरपावर के साथ संबंध कौन नहीं रखना चाहेगा लेकिन अमरीका के साथ चीन जैसे संबंध चाहते हैं. अमरीका की जंग लड़ते हुए पाकिस्तान ने बहुत ज़्यादा नुक़सान उठाया है. अब हम वो करेंगे जो हमारे लोगों के हक़ में बेहतर होगा.”
इसी इंटरव्यू के दौरान इमरान ख़ान ने कहा कि ट्रंप ने आरोप लगाए हैं कि पाकिस्तान की धरती पर तालिबान चरमपंथी सक्रिय हैं लेकिन सच्चाई ये है कि पाकिस्तान की धरती पर तालिबान का कोई पनाहगाह नहीं है.
इमरान ख़ान ने कहा कि अमरीका ने हमेशा ही पाकिस्तान पर तालिबान चरमपंथियों का समर्थन करने के आरोप लगाए हैं लेकिन सुबूत कभी पेश नहीं किया.
पिछले 70 सालों में पाकिस्तान के साथ अमरीका के रिश्तों में उतार चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन पिछले 18 वर्षों में विभिन्न अमरीकी सरकारों का यह मानना रहा है और मौजूदा सरकार का भी है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति कायम करने के लिए यह ज़रूरी है कि पाकिस्तान की मदद ली जाए.
लेकिन मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के बारे में सख़्त बयानों से दोनों देशों के बीच तनाव सबसे अधिक बढ़ा है.
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि “पाकिस्तान में हर किसी को पता था कि ओसामा बिन लादेन सैन्य अकादमी के क़रीब ही रहता है, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया. हम उन्हें 1.3 अरब डॉलर हर वर्ष आर्थिक मदद दे रहे हैं. हमने अब यह मदद बंद कर दी है क्योंकि वह हमारे लिए कुछ नहीं करते.”
अमरीका पाकिस्तान से यह उम्मीद करता है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान पर यह दबाव भी डाले कि वह अफ़ग़ान सरकार के साथ बातचीत की मेज़ पर आए.
अमरीका का कहना है कि पाकिस्तान के अंदर से काम करने वाले चरंपंथी और आतंकी गुटों से अमरीका को लगातार ख़तरा बना हुआ है.
और अमरीका यह कहता रहा है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों को पनाह देना बंद करे.
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से पहले भी कई अमरीकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ इस तरह की कोशिशें कर चुके हैं, मगर अभी तक इस सिलसिले में कामयाबी मिलती नहीं दिखी है.
-BBC

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