1973 में पुलिस विद्रोह का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है यूपी, मारे गए थे 30 पुलिसकर्मी

भारत में पुलिस विद्रोह का सबसे बड़ा उदाहरण भी यूपी पुलिस ने पेश किया था. साल था 1973. यह विद्रोही PAC Provincial Armed Constabulary) ने किया था. मई 1973 में हुए इस विद्रोह को आमतौर पर PAC म्यूटिनी (पीएसी की बगावत) के तौर पर जाना जाता है. इस बगावत के दौरान उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पूरी पुलिस व्यवस्था के ही ढह जाने का खतरा हो चुका था. इस विद्रोह को दबाने में प्रशासन को पांच दिन का समय लग गया था. साथ ही इसे दबाने के लिए राज्य को सेना की मदद लेनी पड़ी थी.
सेना की कार्यवाही में मारे गए थे 30 पुलिस वाले
एमबी चंदे ने 1997 में आई अपनी किताब द पुलिस इन इंडिया में इस वाकये का जिक्र किया है. किताब में बताया गया है कि आर्मी ने अपने पहले कदम के तौर पर यूपी के सारे ही जिलों के PAC के उन सारे ही ठिकानों पर कब्जा कर लिया जहां हथियार रखे जाते थे. वैसे इस विद्रोह को दबाने के लिए की गई आर्मी की कार्यवाही में 30 पुलिस वालों की मौत हो गई थी और सैकड़ों गिरफ्तार किए गए थे. अलग-अलग 65 केसों में 795 पुलिस वालों पर केा भी चलाए गए थे. इन पुलिस वालों में से 148 को दो साल की जेल से लेकर आजीवन कारावस तक की सजा हुई थी.
500 पुलिस वालों ने खोई थी नौकरी
500 ऐसे पुलिस वाले जिन्होंने सेना के जवानों पर गोलियां चलाई थीं, उन्हें निकाल दिया गया था. हालांकि हज़ारों पुलिस वालों को निकाले जाने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन जब यह बात संविधान विशेषज्ञों के सामने आई तो उन्होंने पाया कि यह संविधान के 311 की गरिमा को हानि पहुंचाएगा. इस अनुच्छेद में किसी को नौकरी से निकाले जाने या उसका पद कम किए जाने संबंधी नियम दर्ज हैं.
जब पुलिस के इस विद्रोह की जांच हुई तो निम्न कारण पाए गए थे –
1. नौकरी के लिए असंतोषजनक दशाएं
2. PAC में पोस्टिंग के लिए अफसरों का गलत तरीके से सलेक्शन
3. PAC के लोगों का अफसरों के पर्सनल और प्राइवेट कामों में गलत प्रयोग
4. PAC बटालियन का गलत तरीके से बनाया गया संगठन
5. राजनीतिक नेतृत्व का असंवेदनशील होना साथ ही साथ सचिवालय भी पुलिस वालों की समस्याओं और परेशानियों को नहीं सुन रहा था.
6. पुलिस वालों के रहने की व्यवस्था बहुत खराब थी. साथ ही उनके कल्याण के लिए कोई प्रबंध नहीं थे.
गौरतलब है कि UP में पुलिस के सिपाही एक बार फिर विरोध-प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज के मुताबिक 5 अक्टूबर की तरह ही 10 अक्टूबर को भी यूपी पुलिस के बागी सिपाही प्रदर्शन करेंगे. खुफिया रिपोर्ट के आधार पर DGP मुख्यालय ने अलर्ट जारी किया है. इस बीच 5 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करने के मामले में गाजीपुर में दो और सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही 11 पुलिसकर्मियों का तबादला भी कर दिया गया है. हत्याकांड में आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी की पत्नी राखी मलिक ने भी फेसबुक पर पत्र व वीडियो अपलोड कर पुलिसकर्मियों से विरोध न करने की अपील की है. फिर भी कई पुलिस वाले मान नहीं रहे हैं.
-एजेंसियां

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