यूपी के किसान कर रहे हैं अमेरिकन केसर की खेती, कीमत है 2 लाख रुपए किलो

देश के कई इलाके में अब किसान पारंपरिक खेती के तरीकों से अलग हटकर काम कर रहे हैं। किसान ना सिर्फ नई तकनीक अपना रहे हैं बल्कि उन फसलों की खेती पर भी काम कर रहे हैं जिनके बारे में पहले सोचा भी नहीं जा सकता था।
पिछले कुछ सालों से किसान अब उन फसलों की खेती भी ट्राई कर रहे हैं, जो वहां की जलवायु के हिसाब से पहले संभव नहीं थी। उदाहरण के तौर पर यूपी के बुंदेलखंड के किसान थोड़े अधिक मेहनत से अमेरिकन केसर की खेती कर लाखों रुपये कमाने में जुटे हैं।
कायम की मिसाल
कुछ दिन पहले ही बुंदेलखंड के किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की थी और इस खेती से वे अच्छी कमाई कर रहे थे। इससे उत्साहित होकर किसानों ने उन फसलों की खेती भी शुरू कर दी है, जो किसी ख़ास इलाके में ही की जाती थी। पहले कहा जाता था कि केसर सिर्फ वादियों में ही पैदा हो सकता है और वहां का केसर मशहूर भी था। कश्मीर के केसर को जीआई टैग मिला हुआ है, लेकिन बुंदेलखंड में अब किसान ने केसर की खेती कर मिसाल कायम की है।
सूखी जमीन में केसर की खेती
बुंदेलखंड के हमीरपुर में निवादा गांव में अब किसानों ने सूखे इलाके में भी अमेरिकन केसर की खेती शुरू कर दी है। किसानों की ओर से सूखी जमीन और बिलकुल अलग मौसम वाले इलाके में की जा रही केसर की खेती हैरान कर देने वाला मामला है। एक किसान ने बताया, “हमें संदेह था कि इस इलाके में केसर की खेती हो पाएगी या नहीं, लेकिन हमारी कोशिश सफल रही है। दरअसल, यह कोई ठंडा क्षेत्र नहीं है, लेकिन इसे ठंडक देने के लिए खेत में एक दिन में 5-6 बार पानी देने की आवश्यकता होती है।”
किसानों की बढ़ेगी आमदनी
अगर किसान यूपी जैसे इलाके में भी केसर की खेती कर लेते हैं तो यहां के किसानों की आय में काफी वृद्धि हो सकती है। अभी केसर की मांग ज्यादा है और इसके भाव भी दो से तीन लाख रुपये प्हैरति किलो के आसपास हैं। ऐसे में किसान सूखे प्रदेश में कम ठंड वाले इलाके में भी केसर उगा कर अच्छा पैसा कमा सकते हैं।
गुणवत्ता के हिसाब से कीमत
दुनिया में केसर की कीमत इसकी गुणवत्ता के हिसाब से तय होती है। दुनिया के बाजारों में कश्मीरी केसर की कीमत 3 लाख से 5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक है। केसर के पौधे में अक्टूबर के पहले हफ्ते में फूल लगने शुरू हो जाते हैं और नवंबर में यह तैयार हो जाता है। केसर को उगाने की प्रक्रिया काफी लंबी और मुश्किल है, लेकिन इसकी खेती अच्छे तरीके से की जाए तो इससे किसानों को काफी फायदा हो सकता है।
-एजेंसियां

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