Man Animal Conflict को आपदा घोषित करने वाला देश का पहला राज्य बना यूपी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश मानव वन्य-जीव द्वंद्व (Man Animal Conflict) को राज्य आपदा घोषित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अब दूसरे राज्य भी प्रदेश सरकार की इस नीति का अनुकरण करने के लिए प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों से संपंर्क कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार ने यह कदम प्रदेश में मानव वन्य-जीव द्वंद्व की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उठाया है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड आफ फारेस्ट फोर्स पवन कुमार के मुताबिक प्रदेश सरकार के इस कदम से मानव वन्य-जीव द्वंद्व की घटनाओं से प्रभावित लोगों को तत्काल आर्थिक अनुग्रह सहायता मिल सकेगी। प्रदेश सरकार ऐसे द्वंद्व को टालने के लिए ग्रामीणों के बीच न केवल जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा बल्कि उन्हें समझा रही है कि कुछ सावधानियां बरत कर वे ऐसी घटनाओं की रोकथाम भी कर सकते हैं। इन्हें रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक की मदद भी ली जा रही है।
अब ये होगा फायदा
वन्य जीव के आक्रमण से मृतक के परिजन को 5 लाख रुपये की धनराशि राज्य आपदा निधि से स्वीकृत होगी। जिले के जिलाधिकारी स्वीकृति प्रदान कर तत्काल 4 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान कर सकेंगे। राज्य आपदा मोचक निधि के मानक से अधिक व्यय होने वाली धनराशि 1 लाख रुपये वन विभाग अपने विभागीय बजट से राजस्व विभाग को उपलब्ध कराएगा। दूसरे ऐसे संकट की स्थित में जिले का आपदा कार्यालय से जुड़े सभी विभाग वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के सहयोग के लिए स्वस्फूर्त ढंग से परिस्थितियों को संभालने के लिए आगे आएंगे।
हमले में मृत होने पर देय धनराशि
वयस्क की मृत्यु पर: 5 लाख
अव्यस्क की मृत्यु पर: 5 लाख
पूर्ण रूप से अपंग होने पर: 4 लाख
आशिंक रूप से अपंग होने पर: 1 लाख
गंभीर रूप से घायल होने पर: 1 लाख
इसलिए उठाया कदम
बजट का अभाव: आपदा के अंतर्गत मानव वन्य-जीव द्वंद्व को इसलिए शामिल करना पड़ा क्योंकि सरकार के निर्देश पर वन विभाग ने वन्य जीवों से जान माल की हानि की दशा में आर्थिक अनुग्रह सहायता का प्रावधान बनाया है लेकिन आपदा की श्रेणी में शामिल न होने से वन विभाग समय पर प्रभावित व्यक्ति यह लाभ नहीं दिला पाता था, क्योंकि इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं होता था।
संसाधन का अभाव
दूसरे ऐसी घटनाओं को सामने आने पर वन विभाग विपरित परिस्थितियों में सिमित संशाधनों के साथ इस चुनौती से निपटना पड़ता था। तत्कालिक जरूरत के मुताबिक साजों समान खरीदने के लिए कोई फंड नहीं होता था।
तत्काल दे सकेंगे सहायता
स्थिति यह थी कि वन्य जीव के हमले में किसी किसान की मौत होने पर तत्काल अंतिम संस्कार के लिए भी प्रदान की जाने वाली 10 हजार रुपये की धनराशि भी कर्मचारी-अधिकारी अपनी जेब से देते थे। बाद में जांच एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के मिलने वाली आर्थिक सहायता की धनराशि से यह राशि काटी जाती थी।
इन वन्य जीव के हमले में मिलेगी सहायता
राज्य आपदा के अंतर्गत वन्य जीव श्रेणी में बांघ, शेर, तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, मगरमच्छ, हाथी, गैंडा एवं जंगली सुअर को शामिल किया है।
-एजेंसियां

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