स्वर्ण कलश श‍िखर के साथ 2021 तक दुनिया के सामने होगा अनूठा काशी विश्‍वनाथ धाम

वाराणसी। वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के सुंदरीकरण और इसे भव्य बनाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू होने की तैयारी हो चुकी है । अब प्रदेश की कैबिनेट बैठक में काशी विश्वनाथ धाम की डीटेल प्राेजेक्‍ट रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूर कर ली गई है। उत्तर प्रदेश सरकार काशी विश्वनाथ धाम बनाने के लिए अलग से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की एक यूनिट गठित करेगी जो पूरी परियोजना की मॉनिटरिंग करेगी। बताया जा रहा है कि आने वाले 1 हफ्ते के भीतर इस यूनिट का गठन कर दिया जाएगा और दीपावली से पहले काम शुरू होने की उम्मीद है। जिन पत्थरों से बना है ताजमहल, उन्हीं से होगा विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण

पीडब्ल्यूडी विभाग को सौंपी गई जिम्मेदारी

श्रीकाशी विश्‍वनाथ मंदिर से गंगाधार (गंगा तट) तक 400 मीटर क्षेत्र में पचास हजार वर्गमीटर में बनने वाले विश्‍वनाथ कॉरिडोर का 460 करोड़ का डीपीआर मंदिर न्‍यास परिषद की स्‍वीकृति के बाद शासन को भेजा गया था। शासन स्‍तर पर व्‍यय वित्त समिति (ईएफसी) द्वारा लागत में 150 करोड़ की कटौती कर डीपीआर को कैबिनेट की मंजूरी मिलने से अब दिवाली तक टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

नई यूनिट गठित होने से काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण कार्य की देखरेख और सौंदर्यीकरण पर पूरा ध्यान रहेगा। धाम के निर्माण के लिए ज्यादातर काम सीमेंट, कंक्रीट और लोहे, स्टील से जुड़ा है, इसलिए तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है।

नवंबर तक निर्माण कंपनी तय होते ही काम शुरू हो जाएगा और 18 महीने के अंदर यह पूरी तरह आकार ले लेगा। कॉरिडोर का निर्माण लोक निर्माण विभाग कराएगा। इंजिनियरिंग प्रोक्‍योरमेंट ऐंड कंस्‍ट्रक्‍शन (ईपीसी) की तर्ज पर परियोजना को पूरा करने का जिम्‍मा एक ही कंपनी को सौंपा जाएगा। बताते चलें कि विश्‍वनाथ धाम का शिलान्‍यास इसी साल 8 मार्च को प्रधानमंत्री ने किया था। इससे पहले राज्‍य सरकार ने अध्‍ययादेश के जरिए मंदिर परिक्षेत्र को विशिष्‍ट क्षेत्र घोषित कर भवनों के अर्जन की अधिसूचना जारी की थी।

भव्यता के लिए इंस्तेमाल होंगे चुनार के पत्थर

काशी विश्वनाथ धाम की आधारशिला रखने के बाद राजकीय निर्माण निगम को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन राजकीय निर्माण निगम की तरफ से परियोजना में 12 फीसदी का कंसल्टेंसी चार्ट जोड़ने की वजह से यह मामला ठंडा पड़ गया था। अब काशी विश्वनाथ धाम को भव्य बनाने के लिए सरकार बेहतर व्यवस्था कर रही है। कैबिनेट में पेश डीपीआर के मुताबिक मंदिर परिषद में मकराना, मार्बल, ग्रेनाइट और चुनार के पत्थरों का उपयोग किया जाएगा, इसके अलावा दूसरे भी कई तरीके के पत्थर उपयोग में लाए जाएंगे।

श्रद्धालुओं के लिए होगी ये खास व्यवस्था

कहा जा रहा है कि इस पूरे परिसर में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाधन, जलपान गृह, लाइब्रेरी, मल्टीपरपज हॉल सहित कई केंद्र विकसित किए जाएंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट में गंगा स्नान करके सीधे काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने आने वाले बुजुर्गों के लिए और दिव्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था होगी। बीच में दो एस्केलेटर लगाए जाएंगे इससे बगैर किसी दिक्कत के श्रद्धालु सीधे मंदिर तक आ सकेंगे। इस मंदिर का निर्माण और सुंदरीकरण दिसंबर में शुरू हो जाएगा और सरकार ने इसके लिए तमाम जरूरी मंजूरी भी दे दी हैं।

आनंद कानन में होगा रुद्र वन
बाबा दरबार परिसर से ललिता एवं मणिकर्णिका घाट तक बनने वाला कॉरिडोर वास्‍तविक रूप से धर्म नगरी का अहसास कराएगा तो यहां आनंद कानन और रुद्र वन की परिकल्‍पना साकार होगी। इस लिहाज से पांच लाख वर्ग फीट के कॉरिडोर एरिया में सिर्फ 30 फीसदी क्षेत्र में निर्माण होगा। कल्‍चरल सेंटर, वैदिक केंद्र, टूरिस्‍ट फसिलिटेशन सेंटर, सिटी म्‍यूजियम, जप-तप भवन, भोगशाला, मोक्ष भवन और दर्शनार्थी सुविधा केंद्र अधिकतम दो मंजिला ही होंगे और ऊंचाई विश्‍वनाथ मंदिर के शिखर से ऊपर नहीं होगी। रुद्र वन में रुद्राक्ष के 350 से ज्‍यादा पौधे लगाए जाएंगे। सुरक्षा एयरपोर्ट जैसी होगी।

250 साल बाद जीर्णोद्धार
काशी विश्‍वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करीब 250 साल बाद होने जा रहा है। 1780 में महारानी अहिल्‍याबाई होल्‍कर ने मंदिर बनवाया था। इसके बाद आसपास मंदिर बने और मंदिरों में सेवा करते-करते लोगों ने आवास बना लिए। इसके चलते आनंद कानन का अविमुक्‍त क्षेत्र भवनों से घिर गया था। अब मंदिर और आसपास का क्षेत्र पूरा खुला नजर आएगा। सावन और शिवरात्रि में सड़क पर लंबी लाइन नहीं लगेगी। कॉरिडोर में बनने वाले दो बड़े कोर्ट यार्ड में एक लाख से ज्‍यादा श्रद्धालु आराम से खड़े हो सकेंगे।

-Legend News

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