अनूठी पहल: श्मशानघाट के डोम व ब्राह्मण समाज ने किया सहभोज

आगरा। ताज नगरी को विद्युत शवदाह गृह, पोस्टमार्टम गृह, चैरिटेबल डायलिसिस सेंटर, आकस्मिक दुर्घटना वाहन सेवा, अज्ञात मृतकों के दाह संस्कार व अस्थि विसर्जन जैसी अद्भुत सेवाओं के बाद आगरा में हेल्प आगरा तथा सूरत में सेवा फाउंडेशन की स्थापना करने वाले प्रमुख समाजसेवी अशोक गोयल ने सेवा के क्षेत्र में एक और अनूठी पहल की। इस पहल के अंतर्गत अपनी धर्मपत्नी श्रीमती ब्रज लता गोयल के एकादशी उद्यापन को उन्होंने सामाजिक सरोकार से जोड़ा। इसके तहत शुक्रवार को महाराजा अग्रसेन भवन, लोहा मंडी में एकादशी समरसता सहभोज का आयोजन किया गया। एकादशी भोज में परिपाटी के अनुसार 26 ब्राह्मण जोड़ों को भोजन कराया जाता है, लेकिन इस भोज में 13 जोड़े ब्राह्मण समाज के व 13 जोड़े वाल्मीकि, जाटव, कोरी, श्मशान घाट के डोम व अन्य अनुसूचित जाति वर्ग से थे। सभी ने एक पंगत में एक साथ भोजन ग्रहण किया। इन ब्राह्मणों में कर्मकांडी भी थे और वकील, डॉक्टर और बैंक अधिकारी भी शामिल थे। संभवत: विश्व में पहली बार किसी एकादशी उद्यापन में ऊंच-नीच, जातिवाद, वर्ग भेद की दीवारें इस तरह गिराने का यह पहला प्रयास आगरा में हुआ।

समारोह में मुकेश जैन, बन्टी ग्रोवर, अशोक जैन सीए, हर नारायण गर्ग, सुशील जैन, सतीश माँगलिक, डा. सुरेश गोयल, विजय गोयल सहित कई प्रमुख हस्तियां इस अनूठी पहल की साक्षी बनीं। मोदी जी ने जिस तरह प्रयागराज में पूजा की, वही समरसता का नजारा इस एकादशी सहभोज में देखने को मिला। देर शाम देवोत्थान एकादशी के महत्व पर प्रकाश डालने वाले नाटक का मंचन किया गया। रंगकर्मी अनिल जैन, संजय बंसल और उमा शंकर मिश्रा का निर्देशन रहा। पिता श्री देवीदास गोयल की छत्र छाया में वीना, रेनू, रश्मि, चित्रांशी , अंजनी गर्ग, अंकिता , रीनू , मनीष गर्ग, दीपक , अनुपम और पंकज गोयल आदि सभी परिवारीजनों व इष्ट मित्रों ने सभी का स्वागत किया और सभी व्यवस्थाएं संभालीं।

अशोक गोयल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज में एकजुटता, अपनेपन और भाईचारे का प्रसार करना तथा समाज को छुआछूत और जातिवाद के जहर से मुक्ति दिलवाना है। आज के मुख्य आकर्षण डोम के रूप में पहचान रखने वाले शमसान घाट के वाल्मीकि रहे, जिन्होंने ब्राहमण समाज के साथ सपत्नीक भोजन किया।

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