दीक्षांत समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा, संस्कृति विवि की शिक्षा सराहनीय

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय (sanskriti University)  में सत्र 2019 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विवि के मेधावी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और भारतीय शिक्षा ने हमेशा दुनिया को रास्ता दिखाया है ताकि इसे जीने के लिए बेहतर जगह मिल सके। आपकी शिक्षा आपकी विरासत है यह आगे चलकर आपकी पहचान बनाएगी। हमेशा उत्साह के साथ इसका उपयोग करें।

उन्होंने कहा कि हम कोविड- 19 के कठिन दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमारे नए ऑनलाइन मिश्रित शिक्षण और अध्ययन ने हमें शिक्षा में परिवर्तन के एक नए डिजिटल युग में ला दिया है और भारत ने इस कठिन परिस्थिति को आशावादी रूप से पार कर लिया है क्योंकि हमारे पास दुनिया में सबसे बड़ी संख्या में युवा विद्यार्थी हैं। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि सन 2016 में शुरू संस्कृति विश्वविद्यालय ने एक नवोदित विश्वविद्यालय के रूप में खुद को समयानुसार विकसित करते हुए कर मल्टी डिस्पिलिनरी एजूकेशन और रिसर्च युनिवर्सिटी (एमईआरयूएस) के रूप में स्थापित कर लिया है, जिसमें देश के लगभग सभी हिस्सों से आने वाले 6000 से अधिक विद्यार्थी, मथुरा में अपने आदर्श स्थान पर नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह खुशी की बात है कि विश्वविद्यालय के पास स्वास्थ्यवर्धक, आर्थिक विकास और सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने वाले परिवेश के लिए एक सतत और सामाजिक रूप से जिम्मेदार पूर्ण योगदान के लिए निरंतर प्रयास करने की दृष्टि है। यह देश में वैश्विक मानकों के सर्वश्रेष्ठ बहु आयामी शिक्षा के मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।
उन्होंने स्नातकों को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण दिवस है और आपके विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उन सभी डिग्री धारकों, पदक और पुरस्कार विजेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर यह सफलता अर्जित की है। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए प्रगतिशील सोच आवश्यक है।
इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के सभी मेधावी और मेधावी डिप्लोमा, यूजी और पीजी छात्रों को असाधारण शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया।
rajat-sharma-in-sanskriti-univ-convocationइस मौके पर गेस्ट ऑफ ऑनर पद्म भूषण रजत शर्मा ने उपाधियां प्राप्त करने वाले व पदकों से सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनको आगे बढ़ने और देश को ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना ने हमारी जीवन शैली को ही बदल कर रख दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी सेहत, समय और संबंध का महत्व जाने और उसे बचाकर रखें। अपने जीवन में जब सबल बन जाएं तो जीवन में किसी एक गरीब विद्यार्थी की मदद जरूर कर सकें।
इस अवसर पर, चांसलर सचिन गुप्ता ने छात्रों को बधाई दी और कहा “संस्कृति विश्वविद्यालय युवा पीढ़ी को उपयुक्त मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है जो उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण और आवश्यक है। इसके साथ ही संस्कृति विवि देश और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को जीवनभर सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
टेक्निया ग्रुप आफ एजूकेशन के चेयरमैन, संस्कृति विवि के आनरेरी चेयरमैन आरके गुप्ता ने विद्यार्थियों से कहा कि आप जीवन के किसी मुकाम पर पहुंचें अपने विश्वविद्यालय से जुड़े रहें। विवि में पढ़ने वाले बच्चों के लिए आप प्रेरणा बनें और आपकी कोशिश होनी चाहिए कि आपके बाद विवि से निकलने वाले छात्र आपसे आगे बढ़ें।
कुलपति प्रोफेसर सीएस दुबे ने स्वागत भाषण दिया और विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने दीक्षांत समारोह के दौरान उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों, स्नातक, शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों, अभिभावकों, छात्रों और सभी सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने सभी सफल छात्रों को बधाई दी और कहा कि “स्नातकों को आजीवन सीखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और उन्हें गतिशील दुनिया के साथ अनुकूलन करने के लिए नवीनतम तकनीकों को सीखना जारी रखना चाहिए।

समारोह के दौरान एमएसएमई भारत सरकार के मुख्य निदेशक पन्नीरसेलवम एवं प्रख्यात ज्योतिषी पंडित आर.के. शर्मा को मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। समारोह का शुभारंभ कुलाधिपति सचिन गुप्ता द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह में दिव्यांग फाउंडेशन विज़न के चेयरमैन मुकेश गुप्ता, विश्वविद्यालय के सलाहकार अनिल माथुर, कार्यकारी निदेशक पीसी छाबड़ा, विशेष कार्याधिकारी श्रीमती मीनाक्षी शर्मा और सीओई राजेश टंडन के अलावा विवि के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके सभी कैरियर प्रयासों में सफलता की कामना की। शीर्ष रैंकधारकों को प्रमाणपत्र के साथ स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। परिवार और दोस्तों ने अपने बच्चों और साथियों की अद्भुत उपलब्धि पर खुशी और गर्व व्यक्त किया। विद्यार्थियों के लिए यह दिन याद रखने लायक था। कार्यक्रम का संचालन संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षिका डा. आदित्या पारीख ने किया।

डिग्रियां, पदक पाकर विद्यार्थियों का बढ़ा मान

convocation-of-sanskriti-university-mathuraसंस्कृति विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई। साथ ही अपनी कक्षाओं में विशेष योग्यता हासिल करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ, पद्म भूषण रजत शर्मा मौजूद थे। डिग्रियां और पदक पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।

दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक से सम्मानित छात्रा अंकिता वर्मा, सरिता सारस्वत, मोनिका चौधरी, खुशबू यादव, प्रियंका बत्रा, हेमलता, जैसिका अग्रवाल, आयुषी त्यागी, पलक खंडेलवाल, नवनी अग्रवाल, प्रियंका सिंह, मनीषा अग्रवाल, चिंकी मित्तल, निशा अग्रवाल, यशिका गर्ग, छात्र दिनेश, ललित प्रताप, मिलन कुमार मजूमदार, गौरव गुप्ता, अनिषा, प्रिया कुमार, मनोज कुमार, नेहा सिंह, शनि कुमार चौरसिया, दिवाकर शर्मा, आशीष, दीप्ती खंडेलवाल, ब्रजलता, प्रियंका चक्रवर्ती, रजत पदक से प्रियंका अग्रवाल, कीर्ति अग्रवाल, दिव्या सारस्वत, ललितेश कुमारी, प्रियंका यादव, दिवाकर कुमार सिंह, नम्रता खत्री, ज्योति, दीक्षांत सिरोही, काजल बंसल, शशांक शर्मा, यशिका वार्ष्णेय, ऋतिका अग्रवाल, कोमल भारद्वाज, दीक्षा शर्मा, सन्नी, संजीव, अंकुर मिश्रा, नीतू पाठक, रब्बुल अंसारी, संजू, सुभाष पाठक, राजवीर, सौरभ, दीपिका चौधरी, बबली सैनी को सम्मानित किया गया। वहीं छात्रा तारावती, सपना सिंह, हामिद अनवर, पूजा कुमारी, कीर्ति गहलौत, हिमानी गौतम, डिंपल अग्रवाल, तन्वी गर्ग, उर्वशी भारद्वाज, संगम शर्मा, आयुषी कुमार, प्रीति शर्मा, हितेष कुमार, अनुज सैनी, विक्रम सिंह, प्रशांत प्रताप सिंह, चंद्र सैन और छात्रा राजेश्वरी सिन्हा को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।

संस्कृति विवि ने विद्यार्थियों को दी है एक उच्च जीवन शैलीःप्रोफेसर दुबे

संस्कृति विश्वविद्यालय में आज दीक्षांत समारोह की हलचल थी तो विद्यार्थियों के चेहरे पर उनकी मेहनत का परिमाम मिलने की खुशी। बैंडबाजों के साथ अकेडमिक परेड ने जब सभागार में प्रवेश किया तो सभागार उपस्थित लोगों की तालियों से गूंज उठा। विश्वविद्यालय की सफलता की कहानी जब कुलपति प्रोफेसर दुबे ने अपनी रिपोर्ट में पढ़ना शुरू किया तो उपस्थित लोगों ने बार-बार तालियां बजाकर इन उपलब्धियों पर हर्ष व्यक्त किया।

प्रोफेसर दुबे ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि करोना के चलते जहां दुनिया ये सोचने में व्यस्त थी कैसे समस्याओं से निपटें, तब संस्कृति विवि प्रशासन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न इसके लिए योजना बना रहा था। विवि ने समय से आनलाइन कक्षाएं शुरू कर पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया। सैंकड़ों की संख्या में विशेषज्ञों की वेबिनार कराई गईं ताकि उच्च शिक्षा के स्तर पर विद्यार्थियों को उत्कृष्ट ज्ञान हासिल हो। प्रोफेसर दुबे ने एक प्रेरणादायक कविता, हिम्मत को मत हार मुसाफिर…से अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने इसी बीच माइक्रोसाफ्ट, अपग्रेड और अमेजन से एमओयू कर विद्यार्थियों के लिए विश्वस्तरीय कौशल और ज्ञान हासिल करने की व्यवस्था की है। दुनिया के चुनिंदा संस्थानों से विद्यार्थियों के एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए हाथ मिलाए हैं।

अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० के अनुरूप, विश्वविद्यालय ने बौद्धिक,सामाजिक, शारीरिक, भावनात्मक और साथ ही नैतिक दृष्टि से विद्यार्थियों की सभी क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से एक दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है और इसके लिए मल्टी डिस्पिलिनरी शिक्षा को अपनाया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों के समग्र व्यक्तित्व को विकसित करके उन्हें न केवल एक उत्कृष्ट पेशेवर बनाना है, बल्कि मानवीय मूल्यों के लिए समझ और सम्मान के साथ अच्छे व्यक्ति के रूप में तैयार करना है, जो अपनी विरासत और संस्कृति पर गर्व करते हैं। पिछले साल लगभग 150 पेटेंटों को दाखिल करने के साथ-साथ 1000 से अधिक शोध-आधारित प्रकाशनों के प्रकाशन ने प्रतियोगियों को इसकी सफलता और वृद्धि से अवगत कराया है। विश्वविद्यालय ने अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक मानदंड स्थापित किया है जिससे इसकी साख में सुधार हुआ है। इसी की वजह से यहां के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित कंपनियों में आकर्षक पैकेज पर नौकरियां मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि सेमिनार (अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय) और कॉरपोरेट मीट के अलावा कई सम्मेलनों ने छात्रों की प्रबंधकीय क्षमताओं में योगदान दिया है। संस्कृति विश्वविद्यालय को अपने छात्रों पर गर्व है जिन्होंने हर तरह से इसके विकास में योगदान दिया है। संस्कृति विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के बाद से सामाजिक कल्याण के कार्यों में बढ़चढ़कर भाग लिया है। संस्कृति दिव्यांग स्कूल में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, बौद्धिक, श्रवण और मस्तिष्क संबंधी विकलांग बच्चों के लिए शिक्षा और उनके पुनर्वास की व्यवस्था है।

– Legend News

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