इसे समझिए…दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र है, न कि राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली में उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकार की लड़ाई पर अपना फ़ैसला दे दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल के पास स्वतंत्र फ़ैसले लेने का अधिकार नहीं है और उन्हें मंत्रिपरिषद के सहयोग और सलाह पर ही कार्य करना चाहिए.
कोर्ट ने ये भी कहा है कि भूमि, क़ानून-व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर दिल्ली सरकार के पास अन्य सभी विषयों पर क़ानून बनाने और उसे लागू करने का अधिकार है.
कोर्ट के फ़ैसले में संविधान के अनुच्छेद 239AA का बार-बार जिक्र किया गया और दोनों पक्षों को याद दिलाया गया कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र है न कि राज्य.
देश के सात केंद्र शासित प्रदेशों में से दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाता है. 1991 में संविधान में 69वां संशोधन कर किया गया था, जिसके बाद अनुच्छेद 239AA और 239AB को लाया गया.
समझिए अनुच्छेद 239AA क्या है?
1- इसके तहत दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT of Delhi) कहा गया है और इसके प्रशासक उपराज्यपाल है.
2- दिल्ली की स्थिति अन्य राज्यों या केंद्र शासित क्षेत्र से अलग है.
3- केंद्र शासित क्षेत्र होते हुए भी दिल्ली की अपनी विधानसभा है, जहां अन्य राज्यों की तरह सुरक्षित सीटों का प्रावधान है. विधायकों का चुनाव सीधे जनता करती है.
4- दूसरे राज्यों की तरह दिल्ली में भी मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल का प्रावधान किया गया है, जो विधानसभा के लिए सामूहिक रूप से ज़िम्मेदार होते हैं.
5- दिल्ली में चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी निर्वाचन आयोग के पास है.
निर्वाचित मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को उपराज्यपाल पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं.
6- दिल्ली के उपराज्यपाल के पास अन्य राज्यपालों की तुलना में अधिक शक्तियां हैं.
7- दूसरे राज्यों की तरह दिल्ली के पास पुलिस, कानून-व्यवस्था और भूमि संबंधी अधिकार नहीं हैं. वह इनसे जुड़े कानून नहीं बना सकती है.
ये तीनों अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं.
8- केंद्र और दिल्ली की सरकार अगर किसी एक मुद्दे पर कानून बनाती है तो केंद्र का कानून क्षेत्र में लागू होगा.
9- अगर सरकार और उपराज्यपाल के बीच में कोई मतभेद होते हैं तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति के पास मामला भेज सकते हैं.
10- इमरजेंसी की स्थिति में उपराज्यपाल फैसले ले सकते हैं.
अब समझिए अनुच्छेद 239AB क्या है?
1- यह इमरजेंसी की स्थिति में लागू होता है.
2- अगर मंत्रिमंडल सरकार नहीं चला पा रहा है तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति को इमरजेंसी लगाने की सिफारिश कर सकते हैं.
दिल्ली की सत्ता का इतिहास
1- साल 1952 में जब दिल्ली की गद्दी पर कांग्रेस पार्टी के नेता चौधरी ब्रह्म प्रकाश मुख्यमंत्री थे तो उस समय भी चीफ़ कमिश्नर आनंद डी पंडित के साथ एक लंबे समय तक तनातनी चलती रही. इसके बाद मुख्यमंत्री को 1955 में इस्तीफ़ा देना पड़ा और 1956 में इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया.
2- साल 1956 में दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया था. दिल्ली की विधानसभा और मंत्रिमंडल का प्रवाधान खत्म कर दिया गया.
3- 1966 में दिल्ली एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट लाया गया. जिसके बाद दिल्ली नगरपालिका का गठन किया गया. इसके प्रमुख उपराज्यपाल होते थे.
4-नगरपालिका के पास विधायी शक्तियां नहीं थी.
5- 1990 तक दिल्ली में इसी तरह शासन चलता रहा.
6- इसके बाद संविधान में 69वां संशोधन विधेयक पारित किया गया.
7- संशोधन के बाद राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम, 1991 में लागू हो जाने से दिल्‍ली में विधानसभा का गठन हुआ.
8- दिल्ली विधानसभा में 70 सदस्य तय किए गए.
9- विधायक 5 साल के लिए चुने जाते हैं.
अभिमन्यु कुमार साहा (बीबीसी)

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