IFFCO के एमडी उदय शंकर अवस्थी ने कहा, रसायनिक उर्वरकों पर अब और निवेश नहीं

नयी दिल्ली। IFFCO ने पयार्वरण सुरक्षा के मद्देनजर रासायनिक उर्वरकों पर निवेश बंद करने और ऐसे शोध पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। उर्वरक उत्पादन एवं विपणन करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव IFFCO ने पयार्वरण सुरक्षा के मद्देनजर रासायनिक उर्वरकों पर निवेश बंद करने और ऐसे शोध पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है जिससे फसलों का उत्पादन बढ़े और प्राकृतिक संतुलन कायम रहे।

IFFCO के प्रबंध निदेशक उदय शंकर अवस्थी ने यहां यूएनआई मुख्यालय में वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दुष्प्रभावों की जानकारी के अभाव और अंधाधुध रासायनिक उर्वरको के इस्तेमाल से जमीन और पर्यावरण पर बुरा प्रभाव हो रहा है। कम्पनी ने जैविक उवर्रक को बढ़ावा देने के लिये रासायनिक उर्वरक पर नया पूंजी निवेश नहीं करने का निर्णय लिया है1 पिछले वर्ष इफको ने 84.79 लाख टन उर्वरक का उत्पादन किया था।

उन्होंने कहा कि इफको अब जैविक उर्वरकों के साथ ही नैनो फर्टिलाइजर और जल में घुलनशील उर्वरकों के उत्पादन और शोध पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि चीन ने रासायनिक उर्वरकों पर निवेश नहीं बढाने तथा अमेरिका ने मिसीसिपी नदी के किनारे के कृषि क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बंद कर दिया है। हमें इससे सीख लेने की जरुरत है।

इफको के देश में पांच रासायनिक उर्वरक संयंत्र हैं जिनमें से उत्तर प्रदेश में दो, गुजरात में दो और ओडिशा मे एक संयंत्र है। कम्पनी ने 2016..17 में कुल 84.79 लाख टन उर्वरकों का उत्पादन किया। इनमें से यूरिया का उत्पादन 43.27 लाख टन और डीएपी का उत्पादन 17.87 लाख टन था। कम्पनी ने कुल 107.76 लाख टन उर्वरकों की बिक्री की। कम्पनी का कुल कारोबार 22597.10 करोड़ रुपये था। इफको प्रमुख ने माना कि कृषि को पूरी तरह से रासायनिक उर्वरक मुक्त या पूरी तरह से जैविक नहीं किया जा सकता है इसलिये खेती में रासायनिक उर्वरकों और जैविक, कम्पोस्ट, गोबर की खाद आदि के बीच संतुलन कायम किया जाना चाहिये।
इफको के लगातार प्रयासों से किसानों में आयी जागरुकता को देखते हुए जैविक खाद का उत्पादन एक लाख लीटर से बढ़ाकर 15 लाख लीटर कर दिया है।

डा. अवस्थी ने कहा कि पूरे विश्व में जलवायु परिवर्तन हो रहा है और तापमान में वृद्धि हो रही है जिसके कारण बाढ़ और सूखे की समस्या पैदा हो रही है। दुनिया में पर्यावरण हितैषी प्रौद्योगिकी आ रही है और इफको इन तकनीकों को अपनाना चाहता है। इफको अपने केन्द्रों के माध्यम से प्राकृतिक बदलाव के प्रति किसानों को जागरुक कर रहा है और उन्हें डिजिटल बनाना चाहता है।
उन्होंने सिक्किम की कृषि की चर्चा करते हुये कहा कि इस राज्य को पूरी तरह से जैविक घोषित कर दिया गया है और रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग पर रोक लगा दी गयी है। इससे फसलों के उत्पादन में कमी आयी है और बीमारियां भी बढ़ गयी हैं जिससे किसान परेशान थे। अब इफको ने राज्य सरकार के साथ एक समझौता किया है जिससे किसानों के उत्पादों काे मूल्य संवर्द्धित किया जा सकेगा ताकि उनकी आय में आयी कमी की भरपायी की जा सके।-एजेंसी