संस्कृति विवि में वसंत पंचमी पर हुआ दो दिवसीय आयोजन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रांगण में छात्र-छात्राओं ने दो दिवसीय वसंत पंचमी उत्सव उत्साह के साथ मनाया। मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर दोनों दिन विधिवत पूजा-अर्चना की गई। छात्र-छात्राओं ने इस मौके पर परंपरागत भजन गाकर और नृत्य कर सारे माहौल को भक्ति के भाव में डुबो दिया।

पूजन के लिए उपस्थित हुए पंडित ओम प्रकाश गौड़ ने परंपरागत पूजन के उपरांत छात्र-छात्राओं का ज्ञान वर्धन करते हुए बताया कि ऋतुराज वसंत को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधौं और जीव-जंतु सभी दिख रहे थे लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजायी तो संसार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था वसंत पंचमी का। तब से देवलोक, मृत्यु लोक में वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा होने लगी।

पूजा के उपरांत छात्र-छात्रों ने भजन सुनाए और भजनों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किए। नृत्य-गीत प्रस्तुत करने वाले छात्र-छात्राओं में सुनील श्रीवास्तव, अभिनव कुमार, शुभम कुमार, आकाश कुमार, राजेश, प्रद्युम्न, सजल, आयुष कुमार, कुणाल, अंशिका आर्या, सृष्टि गुप्ता, सुकृति, श्रावंती वाजपेयी, जागृति कुमारी शामिल थीं। पूजन में विवि के कुलपति डा. राणा सिंह व एकेडमिक डीन अतुल कुमार ने भी भाग लिया।

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