तुर्की के राष्ट्रपति की लोगों से अपील, फ्रांसीसी उत्‍पाद न खरीदें

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तेयेप अर्दोआन ने कट्टरवादी इस्लाम पर फ़्रांस के सख़्त रुख़ का विरोध करते हुए लोगों से फ़्रांसीसी उत्पाद न ख़रीदने की अपील की है.
टीवी पर दिए भाषण में उन्होंने कहा, ‘अगर फ्रांस में मुसलमानों का दमन होता है तो’ दुनिया के नेता मुसलमानों की सुरक्षा के लिए आगे आएं.
फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि वो कट्टरवादी इस्लाम के विरोध में धर्मनिरपेक्षता की सुरक्षा करेंगे. अर्दोआन ने मैक्रों के बयान की कड़ी निंदा की है.
फ़्रांस में एक कक्षा में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने वाले एक शिक्षक की हत्या के बाद इस्लाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
सैमुअल पेटी नाम के शिक्षक की 16 अक्तूबर को 18 साल के अब्दुल्लाह अंज़ोरोफ़ ने सिर कलम करके हत्या कर दी थी.
मैक्रों ने पेटी को श्रंद्धांजलि देते हुए कहा था कि ‘फ़्रांस कार्टूनों के आगे नहीं झुकेगा.’
इस्लाम में पैगंबर की तस्वीर बनाना एक बेहद संवेदनशील विषय है और दुनियाभर में मुसलमान इसका विरोध करते हैं.
लेकिन फ्रांस में राष्ट्र धर्मनिरपेक्ष है और यह राष्ट्रीय पहचान के केंद्र में भी है. सरकार का कहना है कि किसी एक धर्म की भावनाओं का ध्यान रखते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करना राष्ट्रीय एकता को कमज़ोर करता है.
ये विवाद क्यों हैं?
सोमवार को टीवी पर प्रसारित संदेश में अर्दोआन ने फ़्रांस में बने सामानों का बहिष्कार करने की अपील की.
उन्होंने कहा, ‘फ़्रांसीसी लेबल वाले सामान ना ख़रीदें, उन्हें भाव ना दें.’
उन्होंने कहा, फ्रांस में मुसलमानों के ख़िलाफ़ ऐसा ही अभियान चलाया जा रहा है जैसा दूसरे विश्व युद्ध से पहले यहूदियों के ख़िलाफ़ चलाया गया था.
अर्दोआन ने कहा कि यूरोपीय देशों के नेताओं को फ्रांस के राष्ट्रपति से कहना चाहिए कि वो अपना नफ़रत भरा अभियान बंद करें.
इससे पहले अर्दोआन ने मैक्रों पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच होनी चाहिए.
अर्दोआन की टिप्पणी के बाद फ्रांस ने तुर्की में अपने राजदूत को बुलाकर सलाह-मशविरा किया है.
सैमुअल पेटी की मौत के बाद मैक्रों ने कहा था कि वो कट्टरवादी इस्लाम से सख़्ती से निबटेंगे और देश की धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करेंगे.
पेटी पर हमले से दो सप्ताह पहले ही मैक्रों ने कहा था कि इस्लाम ऐसा धर्म है जो संकट में है. उन्होंने कहा इस्लामी अलगाववाद से निबटने के लिए नए क़दम उठाने की घोषणा भी की थी.
पश्चिमी यूरोप में सबसे ज़्यादा मुसलमान फ़्रांस में ही रहते हैं. कुछ मुसलमानों का कहना है कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर उन्हें निशाना बनाया जाता है.
यूरोप में क्या प्रतिक्रिया है?
यूरोपीय देश फ़्रांस के समर्थन में आ गए हैं. जर्मनी ने मैक्रों के साथ एकजुटता ज़ाहिर की है और अर्दोआन के बयान की आलोचना की है.
नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री मार्क रूटे ने कहा है कि उनका देश मज़बूती से फ़्रांस के साथ खड़ा है. वहीं इटली के प्रधानमंत्री जूज़ेपे कोंटे ने भी फ्रांस के साथ एकजुटता ज़ाहिर की है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, निजी हमलों से वो सकारात्मक एजेंडा मज़बूत नहीं होता है जिसे यूरोपीय संघ तुर्की के साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है लेकिन अर्दोआन अकेले ऐसा नेता नहीं है जिन्होंने मैक्रों की आलोचना की है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने रविवार को किए एक ट्वीट में फ़्रांस के राष्ट्रपति पर इस्लाम पर हमला करने के आरोप लगाए हैं.
वहीं जॉर्डन, क़तर और कुवैत जैसे देशों में फ़्रांसीसी उत्पादों को दुकानों से हटाया जा रहा है .
इसके अलावा बांग्लादेश, इराक़, लीबिया और सीरिया में भी फ़्रांस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं.
समाचार जेंसी रॉयटर्स ने तुर्की के सांख्यिकी संस्थान के हवाले से कहा है कि फ़्रांस तुर्की में आयातित उत्पादों का दसवां सबसे बड़ा स्रोत है.
फ्रांस की कार निर्माता कंपनी रेनो देश में बिक्री के मामले में शीर्ष ब्रांड में शामिल है.
फ़्रांस के साथ तुर्की के रिश्तों में बढ़ रहा है तनाव
बीते कुछ महीनों से फ़्रांस और तुर्की के बीच तनाव बढ़ रहा है. फ़्रांस और तुर्की दोनों ही नेटो के सदस्य हैं लेकिन नागार्नो-काराबाख़ में अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच चल रहे युद्ध दोनों देश अलग-अलग पक्षों का समर्थन कर रहे हैं. लीबिया में चल रहे गृहयुद्ध में भी फ़्रांस और तुर्की विपरीत पक्षों का समर्थन कर रहे हैं.
पूर्वी मध्यसागर में तुर्की के तेल और गैस के भंडार खोजने के अभियान को लेकर भी फ़्रांस ने तुर्की का विरोध किया है. बढ़ने तनाव के बीच फ़्रांस ने अगस्त में इस इलाक़ें में अपने लड़ाकू विमान और युद्धक जहाज़ भी तैनात कर दिए थे.
जनवरी में फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने तुर्की के राष्ट्रपति पर लीबिया के संघर्ष में दख़ल ना देने का वादा तोड़ने का आरोप भी लगाया था.
-BBC

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