पीसीए फ्रेमवर्क और एमएसएमई सेक्टर को नियमों में ढील देने की कोशिश

नई दिल्ली। प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए) फ्रेमवर्क में ढील देने और एमएसएमई सेक्टर को कर्ज देने के नियमों में ढील देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 19 नवंबर को आरबीआई बोर्ड की बैठक से पहले आपस में सहमति बनाने के लिए प्रयासरत है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों का कहना है कि अगर पीसीए फ्रेमवर्क पर दोनों के बीच इस बैठक में सहमति नहीं बन पाती है तो अगले कुछ सप्ताह में इन मामलों पर सहमति बन सकती है। अगर आरबीआई ढील देता है तो कुछ बैंक चालू वित्त वर्ष के अंत तक पीसीए फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर आ जाएंगे।
कुल 21 सरकारी बैंकों में से 11 बैंक आरबीआई के पीसीए फ्रेमवर्क के दायरे में हैं। इनमें इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, देना बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं।
आरबीआई किसी बैंक पर पीसीए का फंदा डालने को तब मजबूर हो जाती है, जब बैंक तीन अहम कसौटियों में से किसी एक में भी विफल हो जाता है। इन तीनों कसौटियों में कैपिटल टु रिस्क वेटेज्ड एसेट रेशियो, नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) और रिटर्न टू एसेट (आरओए) शामिल हैं।
सूत्रों का कहना है कि आरबीआई एमएसएमई सेक्टर को सख्त रेटिंग क्राइटेरिया सहित कर्ज के नियमों में ढील देने पर सहमति जता सकता है ताकि इस क्षेत्र में कर्ज के प्रवाह में सुधार हो।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक नकदी किल्लत से जूझ रहे माइक्रो स्मॉल एंड मीडिया इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) और नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनियों (एनबीएफसी) को विशेष छूट दे सकता है।
सरकार का मानना है कि 12 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाला एमएसएमई क्षेत्र अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र नोटबंदी तथा जीएसटी लागू होने के बाद काफी प्रभावित हुआ है और इसे समर्थन की जरूरत है। हालांकि, केंद्रीय बैंक एमएसएमई तथा एनबीएफसी क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था के पक्ष में नहीं है क्योंकि वह इन्हें संवेदनशील क्षेत्र मानता है।
-एजेंसियां

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