मुल्‍ला नसरुद्दीन का सच

पति-पत्‍नी का रिश्‍ता शायद अनादि काल से ऐसे ही चला आ रहा है।
रात के 10 बज गए किंतु मुल्‍ला नसरुद्दीन घर नहीं पहुंचा। मुल्‍ला की बेगम का चिंता के मारे बुरा हाल था। उसकी आंखों से नींद उड़ चुकी थी। वह कभी खिड़की से झांकती तो कभी दरवाजे तक जाकर देखती।
थोड़ी सी आहट पर भी उसे ऐसा लगता जैसे मुल्‍ला अब आ गया, किंतु मुल्‍ला का दूर-दूर तक कुछ पता न था।
आधी रात बीतने के बाद करीब ढाई बजे मुल्‍ला घर पहुंचा तो बेगम उसे देखते ही फट पड़ी।
कहने लगी- कहां थे, ये समय है घर आने का। मेरी जान सूखी जा रही थी और तुम हो कि पता नहीं कहां मौज कर रहे थे।
जल्‍दी मुझे पूरी सफाई दो और सच-सच बताना कि अब तक कहां थे।
मुल्‍ला जो अब तक बेगम के कहे हर शब्‍द को पूरे धैर्य के साथ सुन रहा था, उतने ही धैर्य से बोला- पहले यह तय करके बताओ कि तुम्‍हें सफाई चाहिए या सच।