ट्रंप का दावा: ट्रेड वार से चीन को बड़ा झटका, 30 लाख नौकरियां गईं

बीते साल से अमरीका और चीन एक दूसरे के सामान पर अरबों डॉलर के आयात शुल्क लगा चुके हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप चीन पर ग़लत व्यापारिक गतिविधियों और बौद्धिक संपदा की चोरी के आरोप लगाते रहे हैं.
हाल ही में जी-सात देशों के सम्मेलन में उन्होंने कहा, “बीते कुछ महीनों में चीन को बड़ा झटका लगा है. वहां तीस लाख नौकरियां चली गई हैं और बहुत जल्दी ये तीस लाख से कहीं अधिक हो जाएंगी.”
पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ट्रेड वॉर से चीन को हुए नुकसान पर बयान दिया है. बीते हफ़्ते भी उन्होंने कहा था, “वो बहुत कम समय में पच्चीस लाख नौकरियां खो चुके हैं.”
हमारे इस सवाल का जवाब व्हाइट हाउस प्रेस दफ़्तर ने हॉन्ग कॉन्ग स्थित अख़बार ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ में जुलाई में छपे एक लेख के लिंक से दिया.
इस लेख में चीन के निवेश बैंक, चाइना इंटरनेशनल कैपिटल कॉर्प (सीआईसीसी) के हवाले से लिखा है कि जुलाई 2018 से मई 2019 के बीच मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में ट्रेड वॉर की वजह से 19 लाख नौकरियां चली गई हैं.
इस बारे में और पूछे जाने पर ट्रंप के प्रवक्ता ने कहा कि सीआईसीसी सर्वे में मई के बाद के आँकड़े शामिल नहीं है, जब चीन के सामान पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोत्तरी की गई थी.
हालांकि इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि 25 लाख या 30 लाख के आँकड़े तक राष्ट्रपति ट्रंप कैसे पहुंचे.
बीबीसी ने अमरीका के वित्त विभाग से भी संपर्क किया लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है.
तो चीन में कितनी नौकरियां गईं?
अमरीका-चीन ट्रेड वॉर की वजह से चीन में नौकरियां जाने का कोई आधिकारिक आँकड़ा उपलब्ध नहीं है लेकिन दो चीनी बैंकों के आर्थिक सर्वेक्षण बताते हैं कि इससे औद्योगिक क्षेत्र की 12 लाख से 19 लाख नौकरियों पर असर हुआ है.
आयात शुल्क में बढ़ोत्तरी का चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ा है लेकिन नौकरियां दूसरे कारणों से भी गई हैं.
अमरीका स्थित थिंक टैंक, पीटर्सन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स से जुड़ी मैरी लवली कहती हैं, “नौकरियों में गिरावट को गिना जा सकता है लेकिन समस्या ये है कि इसकी वजह क्या है?”
“किस वजह से ऐसा हुआ है, यह साबित करना असंभव है.”
चीन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नौकरियों में गिरावट पहले से आ रही है क्योंकि चीन अब सर्विस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. वित्त और तकनीक में नई नौकरियां पैदा हो रही हैं. यह बदलाव ट्रेड वॉर शुरू से पहले ही शुरू हो गया था.
चीन का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर क्षेत्र के उन देशों से भी दबाव का सामना कर रहा है जहां सस्ता श्रम उपलब्ध है.
चीन में बेरोज़गारी की स्थिति
चीन की सरकार ने शहरी क्षेत्रों में रोज़गार बढ़ाने पर ख़ास ध्यान दिया है.
बीजिंग स्थित द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट में चीनी अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ डैन वांग कहते हैं, “बंद हुई फ़ैक्ट्रियों का ज्यादातार श्रम शहरी सेवाओं में खप गया है. साथ ही लोग समुद्री प्रांतों से अनहुई, शिचुआन और हेनन जैसे अपने मूल प्रांतों की ओर वापस लौट रहे हैं, जहां स्थानीय उद्योग फल-फूल रहा है.”
विश्व बैंक के मुताबिक़ 2018 में चीन में कुल श्रम शक्ति 78.8 करोड़ की है.
यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बीस लाख की गिरावट का मतलब सिर्फ़ 0.25 फ़ीसदी है.
सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में 3.8 फीसदी बेरोज़गारी है जो 2002 से अब तक सबसे कम है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप का ये बयान ऐसे समय में आया है जब चीन का कम्युनिस्ट पार्टी नेतृत्व नौकरियों के बाज़ार पर ख़ास ध्यान दे रहा है.
जुलाई में देश के सर्वोच्च फ़ैसले लेने वाले संगठन पोलितब्यूरो ने कहा था कि रोज़गार उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
-BBC

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