Trump ने वापस लिया ईरान के खिलाफ सैन्‍य कार्यवाही का आदेश

वॉशिंगटन। ईरान की ओर से अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद राष्ट्रपति डॉनल्ड Trump ने उस पर सैन्य कार्यवाही की मंजूरी दे दी थी। हालांकि ईरान से तनाव के बीच उन्होंने अपने इस आदेश को रात तक वापस भी ले लिया।
राष्ट्रपति के साथ रक्षा अधिकारियों, सदन के नेताओं और प्रशासन के अन्य सीनियर अधिकारियों की गहन मीटिंग हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में Trump ने ईरान के कुछ निश्चित टारगेट्स जैसे राडार और मिसाइल बैटरियों पर पर अटैक को लेकर सहमति जताई थी, लेकिन फिर अचानक ही फैसला बदल दिया।
न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती बातचीत में मंजूरी के बाद Trump ने गुरुवार की शाम को अचानक फैसला बदल दिया। यदि फैसले पर अमल होता तो मध्य पूर्व में अमेरिका की बीते कुछ सालों में यह तीसरी सैन्य कार्यवाही होती। इससे पहले 2017, 2018 में अमेरिका ने सीरिया में सैन्य कार्यवाही की थी।
यह स्पष्ट नहीं है कि Trump ने ईरान पर सैन्य कार्यवाही को लेकर अपना मन क्यों बदला। इस संबंध में पूछे जाने पर व्‍हाइट हाउस की ओर से कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया गया। न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक व्‍हाइट हाउस की ओर से उसके लेख को लेकर भी कुछ नहीं कहा गया है। अमेरिकी की सैन्य योजना से जुड़े एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि ईरान की धरती से हवा में मार करने वाली मिसाइल ने अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन को मार गिराया था। 130 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस ड्रोन को गिराए जाने के बदले में अमेरिका ने सैन्य कार्यवाही का फैसला लिया था।
उन्होंने कहा कि इस हमले में ईरानी सेना और नागरिकों को कम से कम नुकसान होता लेकिन सैन्य अधिकारियों को शाम तक सूचना मिली कि एक्शन को स्थगित कर दिया गया है। कम से कम अस्थाई तौर पर तो यह रद्द ही है। गुरुवार को पूरे दिन ही अमेरिका में इस बात की चर्चाएं होती रहीं कि ईरान पर सैन्य कार्यवाही की जा सकती है।
अमेरिका को ईरान पर ऐक्शन लेना चाहिए या फिर नहीं, इस पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की राय में मतभेद था। सीनियर अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन और सीआईए डायरेक्टर गिना हास्पेल ने ईरान के खिलाफ ऐक्शन का समर्थन किया था। हालांकि रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने इस तरह के एक्शन से असमहति जताई और कहा कि इससे क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा बलों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
-एजेंसियां

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