ट्रंप ने ईरान पर दोबारा लगाए 2015 से पहले वाले कड़े प्रतिबंध

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर वो सभी प्रतिबंध दोबारा लगा दिए हैं जो 2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत हटा लिए गए थे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी साल मई में अमरीका को इस समझौते से अलग कर लिया था.
ट्रंप ने समझौते को खोखला बताया था.
2015 में हुए समझौते के तहत ईरान अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमत हुआ था.
तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि ये समझौता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकेगा.
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन भी इस समझौते का हिस्सा थे. ये पांचों देश समझौते के साथ बने हुए हैं.
इन देशों ने कहा है कि वो अमरीका के प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान के साथ लेनदेन की नई व्यवस्था बनाएगे.
ट्रंप का तर्क है कि समझौते की शर्ते अमरीका के लिए अस्वीकार्य हैं क्योंकि ये समझौता ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने और पड़ोसी देशों में दख़ल देने से नहीं रोक पाया है.
ईरान का कहना है कि ट्रंप ईरान के ख़िलाफ़ मनोवैज्ञानिक युद्ध कर रहे हैं.
भारत को रियायत
इन प्रतिबंधों के तहत उन देशों के ख़िलाफ़ भी अमरीका कठोर क़दम उठा सकता है जो ईरान के साथ क़ारोबार करेंगे.
हालांकि, अमरीका के विदेश मंत्री पोम्पियो ने बताया कि कुछ देश ईरान से होने तेल के आयात को तुरंत नहीं रोक सकते और उन्हें इस शर्त पर रियायत दी गई है कि वे पहले तो आयात घटाएंगे और फिर धीरे-धीरे इसे पूरी तरह बंद कर देंगे.
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक़ अमरीका के ऐसे आठ सहयोगी देश हैं, जिन्हें यह छूट मिली है. इनमें भारत, इटली, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ तुर्की को भी छूट मिली है.
-BBC

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