निरंकारी मिशन के स्तंभ संत KC Malik को दी श्रद्धांजलि

मथुरा। हर गुरुसिख को सेवा की प्रेरणा देने वाले संत KC Malik जी का जीवन परोपकारमय था, वे मथुरा साध संगत के रोशन मीनार थे।

उक्त विचार आगरा से आये ग्वालियर के क्षेत्रीय सेवादल संचालक पुष्पेंद्र ओबराय ने यहां हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर ब्रह्मलीन संतश्री के.सी. मालिक जी के श्रद्धांजलि समारोह में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि आज एक परोपकारी संत को श्रद्धा सुमन तो अर्पित कर ही रहे है, वहीं उनके जीवन से प्रेरणा भी ले रहे है, क्योंकि उनका पूरा जीवन ही प्रभु भक्ति से ओतप्रोत रहा।
श्री ओबराय जी ने कहा कि बधाई के पात्र है मलिक साहब के रिश्तेदार, जिनके परिवार का एक सदस्य सेवा का पुंज बनकर, प्रभु के प्रति समर्पित जीवन जी गया।

अलीगढ़ के संयोजक पीताम्बर शर्मा ने कहा कि मलिक साहब जी ने अभी सिर्फ शरीर छोड़ा है, ब्रह्मलीन तो वह सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करते ही हो चुके थे।

आगरा से आए मास्टर मोहर सिंह ने कहा कि मलिक साहब जी लापरवाही पर डांटते भी थे, किन्तु उनकी डांट में भी सेवा की प्रेरणा ही होती थी, क्योंकि वह सबको परिपूर्ण सेवादार भक्त के रूप में देखना चाहते थे।

होडल के मुखिया डालचंद जी ने कहा कि मलिक साहब जी ने जहां निरंकारी मिशन के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं बच्चे-बच्चे में सेवा की भावना भरी।

दिल्ली से आए प्रचारक ओमप्रकाश अरोड़ा ने कहा कि संत के.सी.मलिक जी ने संचालक के रूप में लगभग साठ वर्ष निरंकारी मिशन की सेवा की, वह हर रविवार को वर्दी पहनकर आते थे, वह मानते थे कि वर्दी उनका गहना है।

श्रद्धांजलि समारोह का संचालन करते हुए निरंकारी मिशन के स्थानीय प्रवक्ता किशोर स्वर्ण ने बताया कि मलिक साहब जी मथुरा डाक घर में पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत रहते हुए ही साठ के दशक में निरंकारी मिशन से जुड़े, उन्होंने ईमानदारी से जहां अपनी नौकरी पूरी की, वहीं निरंकारी मिशन के प्रारंभिक प्रचारक के रूप में मथुरा की पहली मुखिया संत माता राम कौर के साथ गांव-गांव जाकर परमात्मा के प्रति जागरूक किया। 98 वर्षीय मलिक साहब 15 मई की रात को ब्रह्मलीन हो गए थे।

साठ वर्ष मलिक साहब जी के साथ रहे वर्तमान सेवादल संचालक मोहन सिंह ने बताया कि मलिक साहब ने अपना पूरा जीवन बिना किसी महत्वाकांक्षा के निरंकारी मिशन की ऊंचाइयों के लिए समर्पित किया। उन्होंने अपना जीवन गुरु के लिए समर्पित किया हुआ था और अंतिम सांस तक गुरु सेवा और संगत के लिए अपने जीवन को न्योछावर कर दिया।

संयोजक हरविंदर कुमार ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि मथुरा निरंकारी परिवार के लिए उनका समर्पण और त्याग सदैव स्मरणीय रहेगा।

इस अवसर पर पुष्पेंद्र ओबराय, पीताम्बर शर्मा, मास्टर मोहर सिंह, डालचंद, ओमप्रकाश अरोड़ा, लोहरेसिंह, कैलाश चंद्र भगत, घासीराम, आरडी मेहरा, रिशी गुलाटी, विनोद अरोड़ा, मोहन सिंह, हरविंद्र कुमार सहित मलिक साहब के रिश्तेदार तथा उनसे जुड़े गुरुसिखों और कई संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। संचालन किशोर स्वर्ण ने किया।

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