उत्तर प्रदेश में सरकारी मुलाजिमों को निजी अस्पताल से इलाज कराना पड़ेगा महंगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी विभाग में तैनात अफसर व कर्मचारियों को निजी अस्पताल में इलाज करवाने पर विभाग की ओर से मेडिकल रीइंबर्समेंट नहीं मिलेगा। शासन ने सभी सीएमओ को पत्र जारी कर इस व्यवस्था को लागू करने का निर्देश दिया है। शासन के मुताबिक सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने में पर ही विभाग की ओर से खर्च का भुगतान मेडिकल रीइंबर्समेंट के माध्यम से मिलेगा।
किसी भी बीमारी से पीड़ित होने पर सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारी व अफसर सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने के बजाए निजी अस्पतालों में जाते थे, जहां काफी लंबा बिल बनता था। इसका भुगतान मेडिकल रीइंबर्समेंट के जरिए विभाग को ही करना पड़ता था।
इस व्यवस्था में गड़बड़ियां व ज्यादा खर्च होने के कारण शासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीजी हेल्थ डॉ. पद्माकर सिंह के मुताबिक अब सरकारी अस्पतालों व संस्थानों में इलाज करवाने पर ही अफसरों व कर्मचारियों को मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा मिलेगी जबकि पहले सरकारी व निजी दोनों अस्पतालों में इलाज करवाने में जो खर्च आता था, उसका भुगतान सीएमओ द्वारा जांच करवाने के बाद संबंधित विभाग करता था।
कुछ बीमारियों का निजी अस्पताल में होगा इलाज
डॉ. पद्माकर सिंह के मुताबिक शासन की ओर से मिले पत्र में लिखा है कि जिन बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं होगा, सिर्फ उन्हीं का इलाज निजी अस्पतालों में करवाया जा सकता है जबकि पहले अफसर जो इलाज सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क होता था उसका भी इलाज निजी अस्पताल में करवाते थे।
-एजेंसियां

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