Panchkarma विधि से किया जोड़ दर्द से पीड़ितों का उपचार

संस्कृति आयुर्वेदिक कालेज के Panchkarma विशेषज्ञ डा. सुशील की देखरेख में निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया। इस शिविर में जोड़ दर्द से पीड़ित सौ से अधिक मरीजों का पंचकर्म विधि से उपचार हुआ।

संस्कृति यूनिवर्सिटी शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं भारतीय चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में भी ब्रज मण्डल के लिए सौगात साबित हो रही है। संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल में अब किसी भी प्रकार के जोड़ दर्द से लेकर माइग्रेन व लकवा तक का इलाज पंचकर्म चिकित्सा पद्धति से किया जा रहा है। ब्रजवासियों को निःशुल्क चिकित्सा लाभ प्रदान करने के लिए यहां नियमित रूप से शिविर लगाए जा रहे हैं। शनिवार दो फरवरी को संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल में लगे निःशुल्क चिकित्सा शिविर में मथुरा जिले के विभिन्न गांवों के जोड़ दर्द से पीड़ित मरीजों का पंचकर्म विधि से इलाज किया गया।

संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल में पंचकर्म चिकित्सा सुविधा होने से यहां माइग्रेन की समस्या से पीड़ित मरीजों को भी चिकित्सा लाभ मिल रहा है। जिन मरीजों को पेट सम्बन्धी रोग हैं या गैस बनने की शिकायत है अथवा कब्ज के कारण जिनकी पाचन क्रिया सही नहीं रहती ऐसे मरीजों का इलाज भी यहां पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से किया जाने लगा है। पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ डा. सुशील एम.पी. का कहना है कि लगातार काम करने और थकान की वजह से हाथ, पैर, जोड़ों आदि में दर्द होना आम बात है लेकिन अगर यह दर्द कई दिनों तक बना रहे तो शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा में वृद्धि यानी ‘हाइपरयूरीकेमिया’ का भी संकेत हो सकता है, ऐसे में इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

डा. सुशील का कहना है कि देश भर में गठिया के मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। गठिया का मुख्य कारण शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का जरूरत से ज्यादा बढ़ जाना होता है। दरअसल, प्यूरिन नाइट्रोजन युक्त ऐसे कम्पाउंड्स होते हैं, जिनका निर्माण शरीर की कोशिकाओं द्वारा किया जाता है। इसके अलावा प्यूरिनयुक्त चीजों को खाने से भी यह हमारे शरीर में पहुंचता है। यही प्यूरिन हमारे शरीर में पहुंचने के बाद टूटकर यूरिक एसिड में बदल जाता है। हालांकि इसकी ज्यादातर मात्रा खून में मिल जाती है और यूरिन के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाती है। हाइपरयूरीकेमिया की स्थिति में या तो शरीर जरूरत से ज्यादा मात्रा में यूरिक एसिड का निर्माण करने लगता है या फिर इसे सही तरीके से खून में से फिल्टर नहीं कर पाता है। यूरिक एसिड की बढ़ी हुई मात्रा शरीर के जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमने लगती है, जिसका परिणाम अचानक होने वाले जॉइंट पेन के रूप में सामने आता है। इससे मुख्य रूप से एड़ियां, घुटने, हाथ और कलाई की हड्डियां प्रभावित होती हैं। हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनमें विकार उत्पन्न होने लगता है। डा. सुशील का कहना है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को यह परेशानी अधिक होती है। संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल में लगे चिकित्सा शिविर में डा. सुशील एम.पी., गुदा रोग विशेषज्ञ डा. पवन गुप्ता, डा. संतोष कुंतल, नितिन प्रताप सिंह, भगत सिंह, पंचकर्म थेरेपिस्ट प्रभावती, दुर्गेश, देवेश यादव आदि ने सेवाएं प्रदान कीं। डा. पवन गुप्ता ने बताया कि 16 फरवरी को यहां गुदा रोग, बवासीर, भगंदर आदि के पीड़ितों का उपचार किया जाएगा।

उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा के साथ-साथ मथुरा और आसपास के जिलों के लोगों को भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी) से निरोगी रखने को प्रतिबद्ध है। मथुरा धार्मिक नगरी होने के चलते यहां भारतीय चिकित्सा पद्धति का विशेष महत्व है। संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल और संस्कृति यूनानी मेडिकल कालेज एण्ड हास्पिटल चिकित्सा शिक्षा ही नहीं शोध और औषधियों के निर्माण की दिशा में भी अग्रसर है।

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