Hysterea का आसान उपचार के.डी. हास्पिटल में

मथुरा। के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के मानसिक रोग विभाग में पिछले एक सप्ताह में आए Hysterea , मिर्गी के मरीजों के आंकड़े इस बात का सूचक हैं कि मथुरा के लोग धीरे-धीरे टेंशन के दौरों की गिरफ्त में पहुंच रहे हैं। के.डी. हास्पिटल के विशेषज्ञ मनोचिकित्सकों डा. गौरव सिंह और डा. श्वेता चौहान का कहना है टेंशन दौरा मिर्गी नहीं होता इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। टेंशन दौरे में अत्यधिक तनाव होने पर मरीज के दांत भिंच जाते हैं और वह अचेत हो जाता है। यह अवस्था कई मिनट या घंटों तक रह सकती है।

डा. गौरव सिंह का कहना है कि मिर्गी के दौरे में आंख चढ़ी की चढ़ी रह जाती है जबकि टेंशन के दौरे में आंख बंद हो जाती है। मिर्गी के दौरे में लैट्रिन और पेशाब कपड़े में ही छूट जाती है जबकि टेंशन के दौरे में ऐसा नहीं होता। डा. सिंह का कहना है कि Hysterea रोग (टेंशन के दौरे) की चपेट में आए व्यक्ति के पास भीड़ नहीं लगानी चाहिए तथा उसे यह अहसास दिलाएं कि उसे कुछ नहीं हुआ है। इस बीमारी में बोतल या इंजेक्शन का कोई लाभ नहीं होता। उसे कामकाज से न रोकें तथा विशेषज्ञ मनोचिकित्सक से ही उसका इलाज कराएं। डा. सिंह का कहना है कि मिर्गी का इलाज लम्बा चलता है जबकि टेंशन के दौरे का शिकार व्यक्ति चार-पांच माह में ही पूर्ण स्वस्थ हो जाता है। डा. सिंह का कहना है कि के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के मानसिक रोग विभाग में हर सुविधा उपलब्ध है लिहाजा इधर-उधर भागकर जिन्दगी को संकट में न डालें।

डा. श्वेता चौहान का कहना है कि टेंशन का दौरा स्त्री और पुरुष दोनों को हो सकता है लेकिन महिलाएं चूंकि स्वभाव से अधिक संवेदनशील होती हैं और भावनाओं में बहकर अत्यधिक मानसिक तनाव लेती हैं लिहाजा वे इस रोग की चपेट में ज्यादा आती हैं। डा. श्वेता का कहना है कि मथुरा और उसके आसपास के जिलों के लोग प्रायः Hysterea और मिर्गी के दौरे में अंतर नहीं समझ पाते। मिर्गी में रोगी को अचानक दौरा पड़ता है और आधे से एक मिनट के लिए शरीर कड़क पड़ जाता है। मरीज के दांत भिंच जाते हैं, जिससे उसकी जीभ दांतों के बीच में आ जाती है। जीभ कटने से खून भी आ जाता है जबकि टेंशन के दौरे में दांत तो भिंच जाते हैं पर जीभ नहीं कटती।

आर.के. एज्यूकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल का कहना है कि ब्रज के लोगों को इलाज के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े इस बात का ध्यान रखते हुए के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर में उपचार की हर तरह की व्यवस्थाएं हैं। यहां हर रोग के विशेषज्ञ चिकित्सक होने से मरीज शीघ्र ही स्वस्थ होकर अपने घर जाता है। प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल का कहना है कि के.डी. मेडिकल कालेज-हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर का मुख्य उद्देश्य सेवाभावना है।

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