वात, पित्त और कफ के शारीरिक दोषों पर आधरित होता है आयुर्वेद का उपचार

आयुर्वेद किसी भी इंसान के शरीर के दोष के बारे में बात करता है। ये दोष (एनर्जी) तीन तरह की होती हैं- वात, पित्त और कफ। वात हवा और आकाश को रिप्रजेंट करता है। पित्त आग और पानी को और कफ पृथ्वी और जल की एनर्जी को प्रदर्शित करता है। हम सभी में यह एनर्जी टाइप्स मौजूद होते हैं।
आयुर्वेद के मुताबिक हर किसी में किसी एक प्रकार का दोष प्रभावी होता है, बाकी दो संतुलित रहते हैं।
आयुर्वेद एक सिंपल सिद्धांत पर काम करता है कि अगर आपकी डायट गड़बड़ है तो कोई दवा असर नहीं कर सकती। अगर डायट सही है तो दवा की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आप आयुर्वेद के हिसाब से डायट लेना चाहते हैं तो अपने खाने में ये चीजें जरूर शामिल करें।
घी
आयुर्वेद में घी को सुपरफूड माना जाता है। यह मक्खन की अपेक्षा पचाने में आसान होता है। यह टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालता है।
गुनगुना पानी
आयुर्वेद में कई जगह गुनगुने पानी के फायदों का जिक्र मिलता है। यह न सिर्फ शरीर से हानिकारक पदार्थ बाहर निकालता है बल्कि स्किन में ग्लो भी लाता है। हर घंटे पर सादा गुनगुना पानी पीते रहना चाहिए ताकि पानी की कमी न हो और मेटाबॉलिजम सही रहे।
गर्म दूध
ठंडे दूध की तुलना में गर्म दूध पचाना आसान होता है। आयुर्वेद में गुनगुने दूध को काफी पवित्र माना जाता है। अगर इसको सही तरीके से लिया जाए तो यह शरीर के सारे दोषों को बैलेंस करता है और शरीर को शक्ति देता है।
जीरा
जीरे को डायट में शामिल करने के दो तरीके हैं। या तो रात भी जीरे को पानी में भिगाकर रखें और सुबह सबसे पहले इसका पानी पिएं या फिर पानी उबालें और इसमें एक चुटकी जीरा डाल लें। इससे आपका डायजेस्टिव सिस्टम सही रहता है।
-एजेंसियां

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