पारंपरिक तरीकों से भी कर सकते हैं शरीर को आयरन की आपूर्ति

नई दिल्‍ली। कोरोना को हराने के लिए स्वास्थ्य वर्धक चीजें तो अपने भोजन में शामिल करनी ही हैं। साथ ही भोजन पकाने के लिए भी सही विधि अपनानी है ताकि पकने के बाद भोजन अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक बने।
आयरन हमारे शरीर के लिए जरूरी तत्वों में से एक है। शरीर में आयरन की सही मात्रा होना इतना अधिक जरूरी है कि ऐसा ना होने पर हमारे शरीर में खून की कमी हो जाती है। इससे हमें थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना जैसी समस्याएं सबसे पहले घेरती हैं। अगर फिर भी हम आयरन की कमी को पूरा करने का प्रयास नहीं करते हैं तो हार्ट अटैक जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ जाता है।
इन सभी बीमारियों से बचने के लिए हम किस तरह अपने शरीर में आयरन की पूर्ति कर सकते हैं इस बारे में यहां जानते हैं। साथ ही यहां उस पारंपरिक तरीके के बारे में भी जानेंगे, जिसके माध्यम से हमारे पूर्वज और पुरानी पीढ़ियां आयरन की प्राप्ति करते थे और अपने शरीर को बहुत अधिक मजबूत बनाए रखते थे।
यह है आयरन प्राप्ति की पारंपरिक विधि
-आपको पता होगा कि पुराने समय में अनुमान से अगर बात करें तो आज से बमुश्किल 100 साल पहले तक खाना बनाने में मिट्टी और लोहे के बर्तनों का उपयोग होता था क्योंकि इन दोनों ही तत्वों से बने बर्तनों में तैयार होने वाला खाना कहीं अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है।
इस तरह होती है प्राप्ति
-लोहे के बर्तनों में बना खाना हमारे शरीर में आयरन की कमी को दूर करता है। यही कारण है कि आज भी गांव में सब्जी इत्यादि बनाने के लिए स्टील या नॉनस्टिकी कुकवेयर की जगह लोहे की कढ़ाई का ही उपयोग होता है।
-इसकी बड़ी वजह है कि लोहे के बर्तन में खाना पकाने के दौरान दाल और सब्जी में प्राकृतिक रूप से आयरन की वृद्धि होती है क्योंकि जब लोहे को गर्म किया जाता है तो उसमें रासायनिक प्रक्रिया होती है, इस दौरान आयरन बर्तन में पक रहे भोजन में मिल जाता है।
इन्होंने आज भी संभाल रखी है संस्कृति
– बगड़िया और बंजारा प्रजाति के लोगों को देखेंगे कि वे आज भी खाना बनाने में ज्यादातर सिर्फ लोहे के बर्तनों का ही उपयोग करते हैं। बागड़िया और बंजारा प्रजाति के लोग हमारी प्राचीन संस्कृति को कई अलग-अलग रूपों में आज भी संभाले हुए हैं।
मिट्टी के बर्तनों में बना खाना खाने के लाभ
-एक समय पर केवल मिट्टी और लोहे के बर्तनों का उपयोग ही भोजन पकाने के लिए होता था। जिन लोगों का गांव से कनेक्शन है, उन्होंने मिट्टी की हांडी में काढ़े गए दूध का स्वाद जरूर लिया होगा। उनसे पूछकर देखिए कि आज भी उस दूध के स्वाद के आगे सभी फ्लेवर्ड मिल्क फेल हैं!
-मिट्टी के बर्तनों में पका खाना हमारे शरीर को बलिष्ठ बनाने का काम करता है। क्योंकि जिन पांच तत्वों से मिलकर हमारा शरीर तैयार हुआ है उनमें पृथ्वी भी एक मुख्य तत्व है। पुराने समय में जब मिट्टी के चूल्हे पर मिट्टी के बर्तन में खुली रसोई में भोजन पकाया जाता था तो शरीर को अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और आकाश (सूक्ष्म ऊर्जा के रूप में) आदि तत्वों की नियमित प्राप्ति होती थी। इन पंच तत्वों (पंचमहाभूत) से मिलकर ही हमारा शरीर बना हुआ है।
दैनिक जीवन में ऐसे पाएं आयरन
-हमारी प्रकृति ने हमें कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे दिए हैं, जो प्राकृतिक रूप से आयरन से भरपूर होते हैं। इनसे आयरन की प्राप्ति के लिए इन्हें आग पर पकाना नहीं पड़ता है। इनमें केला, अनार और मखाना मुख्य रूप से शामिल हैं। आप अपने दैनिक जीवन में सलाद या स्नैक्स के रूप में इन चीजों का उपयोग करें और अपने शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को सही बनाए रखें ताकि कोरोना या अन्य कोई संक्रमण आपके शरीर पर हावी ना हो पाए।
-एजेंसियां

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