Trade war: भारत के करीब आया चीन, घटाया आयात शुल्क

अमेरिका और चीन से Trade war तेज होने का भारत को भारी फायदा मिल रहा है। चीन ने सोमवार को कैंसर रोधी ड्रग्स समेत भारत की तमाम दवाओं पर आयात शुल्क घटा दिया।

यह भारत के लिए बड़ी कामयाबी है, क्योंकि वह लंबे समय से चीन से औषधि और आईटी सेक्टर के दरवाजे उसके लिए खोलने की मांग करता रहा है। Trade war  के बाद से चीन अब तक 8500 भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी कर चुका है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका से Trade war तेज होने के साथ भारत और अन्य देशों के उत्पादों पर आयात शुल्क में और कटौती करेगी।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि क्या चीन कैंसर की दवाओं को बेचने के लिये भारतीय कंपनियों को लाइसेंस देने पर सहमत हुआ है या नहीं। चीन में हर साल करीब 43 लाख लोग कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं। भारतीय दवाओं विशेषकर कैंसर की दवाओं की चीन में बड़ी मांग हैं क्योंकि ये बहुत सस्ती हैं।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान में अनौपचारिक मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में गर्मजोशी आई है। मोदी ने उस दौरान भारतीय दवा कंपनियों पर चीन में रोक का मुद्दा उठाया था। इसके बाद चीन ने भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए दरवाजे खोलने का फैसला किया है।

चीन की मशहूर फिल्म की याद दिलाई 

चुनयिंग ने कैंसर के मरीज एक डॉक्टर की कहानी पर बनी मशहूर फिल्म डाइंग टू सर्वाइव की याद दिलाई। इस फिल्म में वह भारत से सस्ती जेनरिक कैंसररोधी दवा मंगाते हैं। उन्होंने कहा कि एशिया प्रशांत व्यापार समझौते के तहत चीन पहले ही भारतीय उत्पादों पर शुल्क 33 फीसदी घटा चुका है। साथ ही अन्य उत्पादों पर शुल्क में कमी पर बात चल रही है।

चीन को कपास निर्यात भी बढ़ा

चीन ने भारत से पांच लाख गांठों का आयात करने का अनुबंध किया है। दरअसल, चीन ने अमेरिका से आयातित कपास पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाया है। सितंबर 2018 भारत का कपास निर्यात 21 प्रतिशत तक उछलकर 70 लाख गांठ पर पहुंचने के आसार हैं।

स्टील-एल्युमिनियम में भी राहत

चीन ने पिछले माह ही भारत से आयातित अन्य उत्पादों जैसे रसायन, कृषि उत्पादों, मेडिकल उपकरणों, कपड़ों, स्टील-एल्युमिनियम पर भी सीमा शुल्क घटाया था।

हम उम्मीद करते हैं कि दवाओं पर शुल्क घटाने और खरीद बढ़ाने से भारत और अन्य देशों के लिए चीनी बाजार में नए अवसर पैदा होंगे। हम बाजार बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों के आयात के लिए दरवाजे खोलेंगे। –हुआ चुनयिंग, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

भारतीय किसी के अधीन नहीं रहना पसंद नहीं करते : ग्लोबल टाइम्स

अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापार युद्ध में तेजी के बीच चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत की तरफदारी की है। उसने कहा कि भारतीय किसी के अधीन रहना पसंद नहीं करते और वह अभी गुटनिरपेक्षता पर चलता है। इसलिए उसने चीन को घेरने वाली भारत-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति को खारिज किया है। प्रतिभा के बदौलत भारत ने विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अखबार ने शंघाई सहयोग संगठन में भारत की सदस्यता और भारत-अमेरिका के बीच टूप्लसटू वार्ता रद्द होने का भी हवाला दिया।

जी20 देशों ने सात माह में 39 तरह के टैरिफ लगाए : डब्ल्यूटीओ

विश्व व्यापार संगठन ने कहा है कि अमेरिका और चीन में शुरू हुए Trade war के बीच जी20 देशों ने एक-दूसरे पर सात माह में 39 तरह के शुल्क लगाए हैं। इसमें ऊंचा आयात शुल्क या अन्य कर शामिल हैं।

जी20 में भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, जर्मनी, जापान, कोरिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की सदस्य हैं। पिछले एक साल में ऐसे आयात शुल्क में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। डब्ल्यूटीओ महानिदेशक राबर्टो अजेव ने कहा कि खुले बाजार की जगह संरक्षणवाद की बढ़ती प्रवृत्ति वैश्विक व्यापार विकास के लिए बड़ा खतरा बन गई है।

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