जीएसटी पर राहुल गांधी के बयान से हैरान है ट्रेड-इंडस्ट्री

नई दिल्‍ली। सत्ता में आने पर नया जीएसटी लागू करने संबंधी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बयानों से ट्रेड-इंडस्ट्री हैरान है। हालांकि देश में नई सरकार की सियासी संभावनाओं पर तस्वीर साफ नहीं है लेकिन इंडस्ट्री में आशंका जताई जा रही है कि ऐसे बयानों से आम व्यापारियों में गलत संदेश जाएगा और उसका असर जीएसटी के मौजूदा कलेक्शन पर भी पड़ सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीएसटी में आमूलचूल बदलाव की अब कोई गुंजाइश नहीं है लेकिन इस दिशा में कोई भी पहल कारोबार जगत में भारी उथल-पुथल मचा सकती है।
राहुल ने गत दिवस पश्चिम बंगाल की एक रैली में कहा था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो ‘गब्बर सिंह टैक्स’ की जगह रियल जीएसटी लागू होगा, जिसमें छोटे कारोबारियों को बड़ी रियायतें दी जाएंगी।
इसके दो दिन पहले एक और सभा में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार एंजेल टैक्स खत्म करेगी और जीएसटी में बड़े बदलाव कर सिंगल टैक्स रेट रिजीम स्थापित करेगी।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री की इनडायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमैन विमल जैन ने कहा, ‘जीएसटी में आमूलचूल बदलाव संभव नहीं है और इस तरह के बयान बहुत गंभीर नहीं लग रहे। लेकिन अगर कोई सरकार इसमें अचानक बड़े फेरबदल की कोशिश करेगी तो यह न इंडस्ट्री के हित में होगा और न ही राजस्व के। जीएसटी में पहले ही काफी रेट कट हो चुका है, ऐसे में सिंगल रेट या और कटौती करते ही राजस्व घाटे की हालत बदतर हो जाएगी, जिसे संभालना मुश्किल होगा।’
उन्होंने कहा कि दो साल बाद भी सिस्टम में स्थिरता नहीं आ पाई है, ऐसे में इस तरह के बयान से कई तरह के भ्रम पैदा होंगे और कंप्लायंस पर भी असर होगा।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने बयान को गैरजरूरी और अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि वैकल्पिक टैक्स का कोई ब्लू प्रिंट पेश किए बगैर यह कहना कि नया जीएसटी लाएंगे, गैर जिम्मेदाराना है। ट्रेडर मौजूदा जीएसटी का विकल्प नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि मार्च और अप्रैल का महीना जीएसटी कलेक्शन के लिहाज से अहम होता है और इस दौरान कारोबारी बकाया और एडवांस टैक्स भी जमा कराते हैं। हालांकि, ऐसे बयानों से कई कारोबारी चुनाव नतीजों तक ठिठक सकते हैं।
वहीं कांग्रेस समर्थक व्यापार और उद्योग संगठनों का कहना है कि मोदी सरकार ने जीएसटी आनन-फानन में लागू किया था, जिसके चलते आज भी सिस्टम पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सका है। सरकार ने कई बड़े बदलाव चुनाव बाद करने के लिए लंबित रखे हैं, ऐसे में अगर कोई नई सरकार नए बदलाव करना चाहे तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
-एजेंसियां

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