Toolkit case: सामने आ रहे हैं हिंसा की अतंर्राष्ट्रीय साजिश के साक्ष्‍य

नई दिल्‍ली। गणतंत्र दिवस पर साजिश की जांच कर रहे दिल्ली पुलिस के सीनियर अफसर का कहना है कि Toolkit के लीक होने से हिंसा की इंटरनेशनल साजिश के चौंकाने वाले साक्ष्य और उनसे जुड़े बड़े नाम सामने आ रहे हैं। अगर टूलकिट लीक न हुई होती तो भारत के खिलाफ अतंर्राष्ट्रीय साजिश की इनवेस्टिगेशन हमारे लिए चैलेंजिंग साबित होती लेकिन अब जांच की लाइन और लिंक आसानी से मिल रहे हैं।
उनके मुताबिक षड्यंत्र के कनेक्शन ट्विटर, टूलकिट और टेलिग्राम से होते हुए खालिस्तान और अब पाकिस्तान तक पहुंच गए हैं।
जांच से जुड़े पुलिस सूत्रों का दावा है कि दिल्ली पुलिस लगभग 115-120 जीबी डेटा की स्क्रूटनी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि टूलकिट साजिश में निकिता का दिशा से भी बड़ा रोल है। सभी आरोपी टूलकिट को आपस मे ‘Comms Pack’ ‘Communication package’ के नाम से बुलाते थे।
पुलिस सूत्रों की मानें तो निकिता के घर 11 फरवरी को जब दिल्ली पुलिस ने सर्च किया तो उनके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से काफी डेटा रिकवर हुआ था। उसमें वॉट्सऐप चैट, ई-मेल वगरैह थे। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने निकिता और पीटर फ्रेडरिक के वॉट्सऐप चैट भी रिकवर किए हैं। बातचीत में दोनों सिक्योर ऐप के नाम पर आपस मे बातचीत कर रहे हैं कि कौन सा ऐप सिक्योर है, जिसके जरिए आपस मे बातचीत की जा सकती है।
सूत्रों ने बताया कि निकिता जैकब ही दिशा रवि को टूलकिट वाली साजिश में लेकर आईं। निकिता सीधे खालिस्तानी समर्थक पीटर फ्रेडरिक के संपर्क में थीं। वह लगातार खालिस्तानी संगठन पॉएटिक जस्टिस फाउंडेशन का ई-मेल भी इस्तेमाल कर रही थीं। छानबीन के बाद पता चला है कि शांतनु और निकिता के कहने पर ही दिशा रवि ने स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को टूलकिट भेजी थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि निकिता के घर पर छापेमारी की गई थी इसल‌िए उसके मोबाइल और लैपटॉप में ज्यादातर डेटा पुलिस के हाथ लग गया है। निकिता के मोबाइल पर वॉट्सऐप चैट से पता चला है कि पीटर फ्रेडरिक से वह लगातार चैट कर रही थीं। विदेश में बैठे एमओ धालीवाल और पीटर फ्रेडरिक ने किसान आंदोलन को बड़ा बनाने और उसके जरिए विद्रोह पैदा करने की योजना बना ली थी। इसके लिए दिसंबर से ही प्लानिंग होने लगी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि निकिता और शांतनु पहले से पॉएटिक जस्टिस फाउंडेशन से जुड़े थे। दोनों पर्यावरण के लिए आवाज उठाने वाले एनजीओ एक्सआर से भी जुड़े थे। इसमें दिशा रवि के अलावा कई देशों के पर्यावरणविद् भी जुड़े थे।
…तो गलती से भेज दी थी बिना एडिट की हुई टूलकिट
शांतनु ने अपने मेल आईडी से टूलकिट का निर्माण करवाया। निकिता और दिशा ने उसमें एडिटिंग की। चूंकि टूलकिट को दुनियाभर के सेलिब्रिटीज को भेजा जाना था इसलिए निकिता के कहने पर दिशा ने अपनी जानकार स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग को बिना एडिट की हुई टूलकिट शेयर कर दी। इसमें जब इनके नाम भी चले गए तो दिशा के होश उड़ गए, उसने तुरंत उसे डिलीट करवाया और एडिट की हुई टूलकिट भेजी, हालांकि तब तक काफी देर हो गई थी। पुलिस का दावा है कि लीक हुए टूलकिट ‘कैलेंडर’ के हिसाब से डिजिटल स्ट्राइक करने और ऑन ग्राउंड एक्शंस में 26 जनवरी को फिजिकल एक्शन का जिक्र था। अभी तक जो हुआ है, टूलकिट में बताए गए एक्शन प्लान से हू-ब-हू मिल रहा है। टूलकिट में किसको फॉलो करना है और किसे टैग करना है, उन सभी को पुलिस जांच दायरे में लाया जाएगा। चाहे वो देश में हों या विदेश में। सूत्रों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो विदेशों में बैठे आरोपियों तक पहुंचने के लिए सभी कानूनी विकल्प इस्तेमाल किए जाएंगे।
-एजेंसियां

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