कब्ज के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है बदलता आहार

कब्ज को लेकर आधुनिक समाज में तरह-तरह की धारणाएं हैं। जिस तरह की जीवनशैली लोगों ने जाने-अनजाने अपनाई हुई है, वह इस समस्या को पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा रही है। बढ़ती उम्र, बदलता आहार, घटती निद्रा, मानसिक चिंताएं, जीवनचर्या, रोग, ऑपरेशन, दवाएं सबका इसमें योगदान रहा करता है। आइए, कब्ज पर नियंत्रण के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बातें करें।
बदलता आहार कब्ज के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार है। लोग रात में देर से भोजन करते हैं और अमूमन उनके आहार का सबसे बड़ा हिस्सा यह डिनर ही होता है। फिर इसमें वे अधिकतर प्रोसेस्ड आहार लेते हैं। इस तरह के भोजन को पचाने में लगने वाला समय सामान्य से अधिक होता है और यह कब्ज को जन्म देता है। साथ ही कम पानी पीने से भी यह समस्या बढ़ जाती है।
आंतों की गतिविधि का संबंध व्यक्ति के जागने से भी है। देर रात खूब जमकर खाने व देर तक सोने से कब्ज की समस्या कई बार बढ़ती नजर आती है। मानसिक स्वास्थ्य का सम्बंध आंतों की चाल से रहा करता है। आधुनिक समाज में जहां चिंता, तनाव, अनिद्रा जैसे रोग बढ़े हैं तो उसी अनुपात में पेट का समय पर खारिज न होना भी देखा जा रहा है।
तमाम रोग भी आंतों की चाल धीमी करके मलत्याग को न होने देने में योगदान देते हैं। कई ऑपरेशनों व दवाओं के बाद भी यह स्थिति देखी जा सकती है, लेकिन समस्या यह है कि आजकल रोगी अपनी जीवनचर्या बदलने की जगह सारा दोष बीमारी, दवाओं, ऑपरेशनों पर मढ़कर छुट्टी पाना चाहते हैं। यह गलत धारणा है। कब्ज के रोगी जीवनचर्या , आहार, निद्रा व मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त कर सकते हैं।
रात को भोजन हल्का व सुपाच्य करें। जल्दी सोएं और जल्दी उठें। पानी का सेवन कम न करें। प्रोसेस्ड व जंक आहार से बचें। मानसिक शांति के ऊपर काम करें व आपाधापी से खुद को बचाएं। इन सब के बाद भी यदि कब्ज की समस्या यथावत रहे तो डॉक्टर से राय लें व उस पर अमल करें।
-एजेंसियां

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