कल होगा Ganpati विसर्जन, जानिए शुभ मुहूर्त

कल Ganpati लेंगे विदाई, ‘अगले बरस तुम जल्दी आना’ की होगी गूंज

मुंबई। महाराष्ट्र में Ganpati का कल विसर्जन कर  दिया जाएगा, पूरे राज्‍य  व शहर  में गणेश चतुर्थी के उत्सव पर सजने वाले बप्पा के पंडाल पूरे देश में मशहूर हैं। बॉलीवुड से लेकर आम लोगों तक सभी बप्पा की मूर्ति को बाजे-गाजे के साथ घर लाते हैं और फिर अपनी यथाशक्ति के अनुसार गणपति को डेढ़ दिन से लेकर पांच, सात या फिर नौ दिन तक घर में रखने के बाद उनका विसर्जन करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जित किया जाता है। बॉलीवुड से लेकर आम लोगों तक सभी बप्पा की मूर्ति को बाजे-गाजे के साथ घर लाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश की प्रतिमा को विसर्जित किया जाता है।

धूमधाम से शुरू हुआ गणेश चतुर्थी का त्योहार 23 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर बप्पा की विदाई के साथ संपन्न होगा। 10 दिनों तक चलने वाला ये पर्व गणपति विसर्जन पर खत्म होता है। इसी दिन अनंत चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के दिन को अनंत चतुर्दशी या अनंत चौदस के रूप में मनाया जाता है।

13 सितंबर से शुरू हुए गणेशोत्सव में लोग 3, 5, 7 दिन के लिए बप्पा की स्थापना करते करते हैं और चतुर्दशी के दिन सभी गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन होता है। अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन सुबह 8 बजे से 12 बजकर 30 मिनट तक, दोपहर 2 बजे से साढ़े तीन बजे तक किया जाएगा. इस दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना बहुत उत्तम माना जाता है। वहीं कुछ लोग इस दिन घरों में सत्यनारायण की कथा भी करवाते हैं।

धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था। 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है, तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है।

इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया। यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई। माटी झरने भी लगी। तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा. इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है।

मान्‍यता है कि गणपति उत्‍सव के दौरान लोग अपनी जिस इच्‍छा की पूर्ति करना चाहते हैं, वे भगवान गणपति के कानों में कह देते हैं. गणेश स्‍थापना के बाद से 10 दिनों तक भगवान गणपति लोगों की इच्‍छाएं सुन-सुनकर इतना गर्म हो जाते हैं कि चतुर्दशी को बहते जल में विसर्जित कर उन्‍हें शीतल किया जाता है।

गणपति बप्‍पा से जुड़े मोरया नाम के पीछे गण‍पति जी का मयूरेश्‍वर स्‍वरूप माना जाता है। गणेश-पुराण के अनुसार सिंधु नामक दानव के अत्‍याचार से बचने के लिए देवगणों ने गणपति जी का आह्वान किया. सिंधु का संहार करने के लिए गणेश जी ने मयूर को वाहन चुना और छह भुजाओं का अवतार धारण किया. इस अवतार की पूजा भक्‍त गणपति बप्‍पा मोरया के जयकारे के साथ करते हैं।

अनंत चतुर्दशी, 23 सितंबर सुबह 6 बजकर 29 मिनट ये लग रहा है और 24 सितंबर सुबह 7 बजकर 19 मिनट बजे तक रहेगा. इस दिन श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है। इस व्रत में स्नानादि करने के बा अक्षत, दूर्वा, शुद्ध रेशम और कपास के सूत से बने और हल्दी से रंगे हुए चौदह गांठ के अनंत की पूजा की जाती है। अनंतदेव का ध्यान करके इस शुद्ध अनंत, जिसकी पूजा की गई होती है, को पुरुष दाहिनी और स्त्री बायीं भुजा में बांधते हैं।

Dharma Desk: Legend News

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