कल 5th January को है संकष्‍ट चतुर्थी का विशेष योग

नई दिल्‍ली। कल शुक्रवार 5th January 2018 को मघा नक्षत्र और चतुर्थी के संयोग से प्रीति नामक शुभ योग बन रहा है। इस योग में प्रेम संबंधित कामों में सफलता मिलती है तथा इस में शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। इसके साथ ही बव और बाल्व नामक दो शुभ करण बन रहे हैं। बव करण को शेर की संज्ञा प्राप्त है। बाल्व कर्ण को चीते की संज्ञा प्राप्त है। इन दोनों कर्मों में शत्रु का संघार और सर्व कामों में सफलता मिलती है। इस विशेष योग में तिलकुटा चौथ पर सिद्धियों के लिए विशेष परिस्थितियां जन्म ले रही हैं। इस चतुर्थी को संकटों से उभारने वाली चौथ कहा गया है। आज के दिन किए गए विशेष उपाय और पूजन से साल भर तक संकट आपके पास भी नहीं फटकेंगे।

महादेव के वरदान अनुसार चन्द्रमा भगवान गणेश का मुकुट बनकर समस्त जगत के शत्रुओं का नाश करते हैं। गणपति को शास्त्रों में भगवान विष्णु का ही अवतरण बताया गया है तथा गणपति को लक्ष्मी प्रिय होने का वरदान भी प्राप्त है। इस दिन विशेष रूप से भगवान गणेश के लक्ष्मी विनायक रूप का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

भविष्य पुराण चतुवर्ग चिंतामणि और कृत्य कल्प तरू शास्त्रों में इस चतुर्थी का महामण्डन किया गया है। इस चतुर्थी पर लक्ष्मीविनायक के पूजन से अपार धन संपत्ति मिलने के योग बनते हैं। ये स्वरूप श्वेत वर्ण है। इनकी दोनों पत्नियां सफेद रंग का कमल धारण किए हुए इनकी दोनों जंघाओं पर विराजित हैं। ये भगवान का अष्टधारी भुजा स्वरूप अपने आठों हाथों में अभयमुद्रा लिए हुए है- तोता, अनार, तलवार, पार्ष, अंकुश, कल्प वृत्र, कमण्डल धारण किए हैं। भगवान गणेश के इस स्वरूप को लक्ष्मी का वरदान भी प्राप्त है। इस स्वरूप के पूजन से देवी लक्ष्मी का स्वयं पूजन हो जाता है। इस मंत्र से करें श्री गणेश और लक्ष्मी को करें प्रसन्न, मिलेगा शांति और तरक्की का वरदान।

मंत्र- ॐ श्रीं गं गणपतये लक्ष्म्यै आगच्छ आगच्छ फट् स्वाहा ॥

इसे तिलकुटा चौथ भी कहते हैं, शुभ मुहूर्त में इस विधि से करें पूजन

कल शुक्रवार दि॰ 05.01.18 को माघ कृष्ण चतुर्थी अर्थात संकट चौथ या तिलकुटा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। कालांतर में इसी दिन गणेश जी ने देवताओं का संकट दूर किया था। तब महादेव ने प्रसन्न होकर गणेश जी को वरदान दिया था कि आज के दिन जो लोग गणपती की संकट मोचन के रूप में पूजा करके व्रत करेंगे उसके सब संकट दूर होंगे। महादेव ने प्रसन्न होकर गणपती को यह भी वर दिया कि संकट चौथ पर चंद्रमा गणेश जी के मस्तक का सेहरा बनकर पूरे विश्व को शीतलता देंगे। जो व्यक्ति संकट चौथ पर गणपती का पूजन कर चंद्र को अर्घ्यदान देगा उसके दैहिक, दैविक व भौतिक विकार दूर होंगे व एश्वर्य, पुत्र, सौभाग्य प्राप्त करेगा। इसे वक्रतुण्डी चतुर्थी भी कहा जाता हैं। इस दिन विद्या, बुद्धि वृद्धि, संकट हरण के लिए विशेष उपाय व अनुष्ठान करना चाहिए। इस दिन मिट्टी से बने गणेश की पूजा की जाती है तथा तिल-गुड़ से बना लड्डू व शकरकंदी चढ़ाई जाती है। अग्नि की सात बार परिक्रमा करके कथा सुनने के बाद जल भरे लोटे से चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। संकट चौथ के विशेष पूजन व उपाय से संकटों का अंत होता है, दुख दूर होते हैं, संतान की रक्षा होती है, घर में पैसा आता है व सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

विशेष पूजन विधि: संध्या के समय घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में गुलाबी कपड़े पर मिट्टी से निर्मित गणपती की मूर्ति स्थापित करके विधिवत पूजन करें। नारियल तेल का दीप करें, गुलाब की अगरबत्ती करें, गुलाब के फूल चढ़ाएं, अबीर से तिलक करें, दूर्वा चढ़ाएं, रेवड़ियों का भोग लगाएं व रुद्राक्ष माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद चंद्रमा को इत्र, शक्कर, चंदन मिले जल से अर्घ्य दें तथा भोग प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

गणेश पूजन मुहूर्त: शाम 18:15 से शाम 19:15 तक।

चंद्रोदय पूजन मुहूर्त: रात 21:23 से रात 22:23 तक।

गणेश पूजन मंत्र: ॐ गं गणेश्वराय विघ्ननायकाय नमः॥

चंद्र पूजन मंत्र: ॐ श्रीं चन्द्राय सकलार्तिहराय नमः॥

सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु गणेश पर चढ़ा तिलकुट 12 गरीब कन्याओं को खिलाएं।

संतान की रक्षा हेतु संतान का नाम लेते हुए गुड-तिल मिले जल से चंद्रमा को अर्ध्य दें।

कल 5th January 2018 को संकट नाश हेतु गणेशजी पर चढ़े 12 तिल-गुड़ के लड्डू किसी विप्र को दान करें।
-एजेंसी