शरद पवार को तोमर का जवाब, नए कृषि कानूनों से MSP को खतरे की बात गलत

नई दिल्‍ली। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को कहा था कि तीनों नए कृषि कानून एमएसपी पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे और मंडी प्रणाली को कमजोर करेंगे. इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जवाब देते हुए कहा कि नए कृषि कानून में एमएसपी को कोई खतरा नहीं है और न ही मंडिया प्रभावित होंगी. कृषि मंत्री ने कहा कि शरद पवार के सामने तथ्य गलत तरीके से पेश किए गए हैं.
नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट करते हुए कहा, “शरद पवार जी वरिष्ठ राजनेता और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री हैं. वे कृषि से जुड़े मुद्दों और उनके समाधान से भलीभांति वाकिफ हैं. पूर्व में उन्होंने भी कृषि संबंधी सुधारों को लाने की पुरजोर कोशिश की थी. नई व्यवस्था में मंडियां प्रभावित नहीं हो रही हैं. इसके स्थान पर मंडियां अब सेवा और अधोसरंचना के संदर्भ में ज्यादा प्रतिस्पर्धी और किफायती साबित हो सकेंगी और दोनों व्यवस्थाएं किसानों के हित के लिए एक साथ समान रूप से क्रियाशील रहेंगी.”
अपने एक और ट्वीट में उन्होंने कहा कि “चूंकि पवार एक वरिष्ठ नेता हैं, मुझे लगता है कि उनके सामने तथ्य गलत तरीके से पेश किए गए हैं. अब जब उन्हें सही तथ्यों की जानकारी हो गई है तो मुझे लगता है कि कृषि सुधारों के प्रति वे अपना रवैया बदलेंगे और किसानों को भी इसके लाभ से अवगत कराएंगे.”
शरद पवार ने क्या कहा था?
तीनों कृषि कानूनों पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को कहा था कि ये कानून एमएसपी पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे और मंडी प्रणाली को कमजोर कर देंगे. पवार ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सर्वदलीय बैठक में डिजिटिल माध्यम से शामिल हुए. बैठक में संसद के बजट सत्र के लिए प्रस्तावित एजेंडा से जुड़े विषयों, किसान आंदोलन, महिला आरक्षण विधेयक और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई.
एनसीपी प्रमुख ने कहा कि नये कानून एमएसपी पर फसल खरीद करने के ढांचे को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेंगे, जिससे मंडी प्रणाली कमजोर हो जाएगी. उन्होंने एमएसपी को सुनिश्चित करने और इस व्यवस्था को कहीं अधिक मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया. शरद पवार ने ट्वीट किया , ‘सुधार एक सतत प्रक्रिया है और एपीएमसी या मंडी प्रणाली में सुधारों के खिलाफ कोई भी व्यक्ति दलील नहीं देगा, लेकिन इस पर एक सकारात्मक बहस का यह मतलब नहीं है कि यह प्रणाली को कमजोर या नष्ट करने के लिए है.’
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *