महेंद्र सिंह Dhoni का आज 38वां जन्मदिन, 1981 में हुआ था जन्‍म

नई दिल्‍ली। टीम इंडिया के दोबारा वर्ल्ड कप जीतने के सपने को 28 साल बाद 2011 में साकार करने वाले महेंद्र सिंह Dhoni का आज 38वां जन्मदिन है। मुश्किल में फंसे मैच को फिनिश करना, बल्लेबाज का क्रीज से पैर उठते ही उसे स्टंप करना या फिर बतौर कप्तान कूल अंदाज में रणनीति बनाना। मैदान पर एक साथ इतनी भूमिकाओं में कोई हो सकता है तो वह टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज महेंद्र सिंह Dhoni हैं। आज भले ही टीम की कप्तानी विराट कोहली के हाथ में है लेकिन महेंद्र सिंह Dhoni आज भी उनके मेंटर के तौर पर फील्ड पर दिखते हैं।
7 जुलाई 1981 को जन्मे महेंद्र सिंह Dhoni ने भारतीय टीम को 1983 के बाद से चले आ रहे वर्ल्ड कप जीतने के लंबे इंतजार को 2011 में खत्म किया था। उनके नेतृत्व वाली इस टीम में कैप्टन सचिन तेंडुलकर भी शामिल थे। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन ने Dhoni की इन शब्दों में सराहना की थी, ‘अपने 22 सालों के क्रिकेट करियर में महेंद्र सिंह धोनी सबसे बेहतर कप्तान हैं, जिनके अंडर में मैंने खेला।’ इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि Dhoni की कप्तानी किस स्तक की रही होगी, जिसकी खुद सचिन जैसे महानतम बल्लेबाज ने सराहना की थी।
सचिन ने कहा था, ‘वह बेहद शार्प हैं और हमेशा अलर्ट रहते हैं। वह स्थिति को अच्छे से समझते हैं और हम हमेशा सुझावों का स्वागत करते हैं। वह बल्लेबाजों, गेंदबाजों और सीनियर प्लेयर्स से अलग-अलग बातचीत कर राय लेते हैं।’ अपने करियर में मोहम्मद अजहरुद्दीन, सौरभ गांगुली, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़ समेत छह कप्तानों के अंडर में खेल चुके सचिन ने Dhoni की मुश्किल वक्त में भी धैर्य न खोने को लेकर सराहना की थी।
सचिन ने कहा था, ‘Dhoni हमेशा शांत रहते हैं और कभी फ्रस्ट्रेट नहीं होते। ऐसे कई मानवीय गुण उनके भीतर हैं, जो उन्हें अच्छा कप्तान बनाते हैं। वह शानदार कैप्टन हैं।’
गौरतलब है कि सचिन तेंडुलकर का हमेशा से यह सपना था कि वह अपने करियर में एक बार टीम को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी जरूर जिताएं, लेकिन वह सपना उनके करियर के अंतिम दौर में 2011 में Dhoni के नेतृत्व में ही पूरा हुआ था।
गांगुली के इस दांव से टीम इंडिया को मिला था सितारा
महेंद्र सिंह Dhoni का एक सितारे के तौर पर उभार भी बेहद रोचक है। असल में महेंद्र सिंह Dhoni जब टीम इंडिया शामिल हुए थे तो उन्हें 7वें नंबर पर बैटिंग के लिए भेजा जाता था लेकिन 5 अप्रैल 2005 को तत्कालीन कप्तान सौरभ गांगुली ने एक दांव चला और उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में तीसरे नंबर पर भेजा। सचिन तेंडुलकर जल्दी आउट हुए और सभी को उम्मीद थी कि गांगुली उतरेंगे लेकिन ड्रेसिंग रूम से बाहर निकले महेंद्र सिंह Dhoni। फिर क्या था माही ने इस मौके को भुनाया और वनडे करियर का पहला शतक (148 रन) उनके बल्ले से निकला। यहीं से टीम इंडिया को एक नया सितारा मिला।
देश को दिला चुके हैं दो विश्व कप खिताब
अपनी कप्तानी में ही उन्होंने भारत को वर्ल्ड टी20 चैंपियन (2007) और वर्ल्ड कप (2011) का चैंपियन बनाया।
इतना ही नहीं, उन्होंने 2015 में आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी का खिताब भी भारत की झोली में डाला। वह दुनिया के एकमात्र कप्तान हैं, जिन्होंने आईसीसी के तीनों खिताबों पर अपना कब्जा जमाया हो।
भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे में की कप्तानी
भारत के लिए सबसे ज्यादा वनडे मैचों में कप्तानी करने वाले एमएस धोनी इस बार विराट के नेतृत्व में यह वर्ल्ड कप खेलने उतरे हैं। 2007 में कप्तानी मिलने के बाद धोनी ने 200 वनडे मैचों में टीम इंडिया की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में टीम इंडिया को 110 मैचों में जीत मिली। वह दुनिया के तीसरे ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा वनडे मैचों में कप्तानी की हो।
बेहतरीन फिनिशर का रुतबा
बांग्लादेश के खिलाफ 2004 में अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले धोनी ने मैच फिनिशर के रूप में अपनी पहचान बनाई। अपने करियर में ज्यादातर समय तक 7वें नंबर पर बैटिंग करने धोनी स्लॉग ओवरों में तेजी से रन जुटाने के लिए जाने जाते हैं। आज धोनी अपनी पारंपरिक शैली से थोड़ा हटकर खेलते दिखते हैं तो उन पर जो सवाल उठते हैं लेकिन नंबर 7 तेजी से रन बनाने के यह मानक उनके ही स्थापित किए हुए हैं।
90 टेस्ट खेल चुके हैं Dhoni 
अब तक माही 90 टेस्ट, 348 वनडे और 98 टी20 इंटरनेशनल मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2015 में उन्होंने भले टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया हो लेकिन उनके फैन्स को उनसे सीमित ओवरों में यह सफर अभी जारी रखने की आस है।
-एजेंसियां

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