13 अक्टूबर को पृथ्वी से सबसे बड़ा और चमकीला दिखेगा मंगल

नासा की जानकारी के मुताबिक़ 13 अक्टूबर को मंगल ग्रह पृथ्वी से सबसे बड़ा और चमकीला सुर्ख़ रंग का दिखेगा. दरअसल, यह एक ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना है जिसमें मंगल ग्रह पृथ्वी व सूर्य एक सीध में हो जाएंगे. इसका मतलब है कि तीनों ग्रह 180 डिग्री कोण पर होते हैं.
इस घटना को खगोलशास्त्र की भाषा में मंगल ग्रह का ‘अपोज़िशन’ कहा जाता है. मंगल ग्रह के अपोज़िशन की घटना प्रत्येक दो वर्ष (26 माह) में होती है.
नासा का कहना है कि मंगल ग्रह और पृथ्वी के क़रीब आने की खगोलीय घटना हर दो साल (लगभग 26 महीने) पर एक बार होती है इसलिए अगली बार मंगल ग्रह और पृथ्वी दोनों एक दूसरे के नज़दीक दिसंबर 2022 से पहले नहीं आएंगे.
अपोज़िशन की खगोलीय घटना भले ही 13 अक्टूबर को हो रही है लेकिन पिछले मंगलवार यानी छह अक्टूबर को ही मंगल ग्रह पृथ्वी के सबसे नज़दीक आ गया था.
हालांकि नज़दीक आने के बावजूद पृथ्वी से मंगल ग्रह की दूरी 38.6 मिलियन मील थी. अब साल 2035 तक मंगल और पृथ्वी इतने क़रीब नहीं आएंगे.
2003 में मंगल ग्रह पृथ्वी से 34.8 मिलियन मील की दूरी तक पहुँचा था जो कि 59,619 सालों में सबसे नज़दीक था. अब साल 2287 तक यह दोबारा पृथ्वी के इतने क़रीब नहीं आने वाला है.
इस घटना को खगोल विज्ञान में ‘मार्स क्लोज़ एप्रोच’ कहते हैं. जब कभी भी मार्स क्लोज़ एप्रोच की घटना होती है तब अक्सर इस तरह की अफ़वाहें फैलाई जाती हैं कि मंगल ग्रह रात में चांद जितना बड़ा दिखेगा जबकि यह सच नहीं है.
आप टेलीस्कोप की मदद से ज़रूर इसे अच्छे से देख सकते हैं. अगर आप और बेहतर तरीक़े से देखना चाहते हैं तो फिर अपने आसपास के तारा घर या एस्ट्रोनॉमी सेंटर से इसे देख सकते हैं.
हर दो साल पर इस खगोलीय घटना के होने की वजह से ही मंगल ग्रह पर जाने वाला मिशन आम तौर पर दो साल के अंतराल पर भेजा जाता है. ज़ाहिर है इसका कारण यही है कि इसमें कम दूरी तय करनी पड़ती है, यात्रा में समय और ऊर्जा कम लगती है.
फ़िलहाल मंगल ग्रह के तीन मिशन सक्रिय हैं. इन तीनों को इसी साल जुलाई में भेजा गया था. संयुक्त अरब अमीरात के ‘होप’ ऑर्बाइटर, चीन का ‘तियानवेन’ ऑर्बाइटर एंड रोवर और अमरीका का ‘पर्सिवियरेंस’ रोवर.
यूरोप और रूस ने भी अपने रोज़ालिंड फ़्रैंकलिन रोवर को भेजने के बारे में सोचा था लेकिन वो अपने मंगल मिशन को लॉन्च नहीं कर सके. अब उन्हें 2022 तक इंतज़ार करना पड़ेगा.
ग्रहों को एक सीध में आने में 26 महीनों का फ़ासला होता है, इसलिए आपको ये क़ीमत चुकानी पड़ती है.
यूएई, चीन और अमरीका का मंगल मिशन फ़रवरी, 2021 में मंगल ग्रह पर पहुँचेगा.
इससे पहले ‘मार्स क्लोज़ एप्रोच’ की घटना 31 जुलाई 2018 में हुई थी. मई, 2018 में नासा ने मंगल ग्रह मिशन लॉन्च किया था.
पृथ्वी और मंगल ग्रह के बीच दूरी में यह बदलाव ग्रह के अंडाकार कक्षा की वजह से होता है. दूसरे ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण की वजह से ग्रह के कक्षा में लगातार हल्के-फुल्के बदलाव होते रहते हैं.
ख़ास तौर पर बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण बल जिस कक्षा में मंगल ग्रह परिक्रमा करता है, उसे प्रभावित करता है.
मंगल ग्रह को लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसकी सतह पर आयरन ऑक्साइड बड़े पैमाने पर मौजूद है जिसकी वजह से यह लाल दिखता है.
मंगल ग्रह सौर मंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है. पृथ्वी की तरह ही मंगल ग्रह पर उत्तर और दक्षिण ध्रुव मौजूद है जो बर्फ़ से ढके हुए हैं. यहाँ पर तापमान -140 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है.
मंगल ग्रह पर उच्चतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस होता है. मंगल ग्रह पर 25 घंटों से थोड़ा ज़्यादा वक़्त का दिन होता है लेकिन वहां साल पृथ्वी के साल से क़रीब दोगुना लंबा होता है क्योंकि सूर्य की परिक्रमा करने में मंगल ग्रह को 687 दिन लगते हैं.
-BBC

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