हिंदी कथा साहित्य की लेखिका चित्रा मुद्गल का जन्‍मदिन आज

आधुनिक हिंदी कथा साहित्य की बहुचर्चित और सम्मानित लेखिका चित्रा मुद्गल का आज जन्‍मदिन है। चित्रा जी का जन्‍म 10 सितंबर 1944 को चेन्नई (तिमलनाडु) में हुआ था।
उनके लेखन में जहाँ एक ओर मानवीय संवेदनाओं का चित्रण होता है, वहीं दूसरी ओर नए जमाने की रफ्तार में फँसी जिंदगी की मजबूरियों का चित्रण है। चित्रा मुद्गल को उनके उपन्यास ‘आवां’ के लिए 2003 में ‘व्यास सम्मान’ से सम्मानित किया गया था। उनका ये उपन्यास आठ भाषाओं में अनुवादित हो चुका है।
उन्हें सन् 2018 का हिन्दी भाषा का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में स्थित निहाली खेड़ा और उच्च शिक्षा मुंबई विश्वविद्यालय में हुई। बकौल चित्रा मुद्गल, “विद्रोह, संघर्ष और कायरता, मनुष्य को ये सभी चीजें घर से वातावरण से ही मिलती हैं। मुझे भी घर के माहौल ने विद्रोही बनाया।”
उनका जीवन किसी रोमांचक प्रेम-कथा से कम नहीं है। उन्नाव के जमींदार परिवार में जन्मी किसी लड़की के लिए साठ के दशक में अंतरजातीय प्रेमविवाह करना आसान काम नहीं था। लेकिन चित्रा जी ने तो शुरू से ही कठिन मार्ग के विकल्प को अपनाया। पिता का आलीशान बंगला छोड़कर 25 रुपए महीने के किराए की खोली में रहना और मजदूर यूनियन के लिए काम करना चित्रा ने हर चुनौती को हँसते-हँसते स्वीकार किया।
संयोग देखिए कि इसी विद्रोह ने चित्रा मुद्गल को रचना संसार की राह भी दिखाई। पहली कहानी स्त्री-पुरुष संबंधों पर थी, जो 1955 में प्रकाशित हुई।
मुख्य रचनाएँ: ‘आवां’, ‘गिलिगडु’, ‘एक ज़मीन अपनी’, ‘जीवक’, ‘मणिमेख’, ‘दूर के ढोल’, ‘माधवी कन्नगी’ आदि।
पुरस्कार-उपाधि: ‘उदयराज सिंह स्मृति पुरस्कार’ (2010), ‘व्यास सम्मान’ (2003)
अन्य जानकारी: चित्रा मुद्गल का उपन्यास ‘आवां’ आठ भाषाओं में अनुदित हो चुका है तथा यह देश के 6 प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत है। बहुचर्चित उपन्यास ‘एक ज़मीन अपनी’ के लिए सहकारी विकास संगठन मुंबई द्वारा फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ सम्मान से सम्मानित। हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा 1996 के साहित्यकार सम्मान से सम्मानित और 2000 में अपने उपन्यास आवां के लिए यूके कथा सम्मान से सम्मानित।
अब तक नौ कहानी संकलन, तीन उपन्यास, एक लेख-संकलन, एक उपन्यास, एक लेख-संकलन, एक बाल उपन्यास, चार बालकथा-संग्रह, छह संपादित पुस्तकें। गुजराती में दो अनूदित पुस्तकें प्रकाशित। अंग्रेज़ी में ‘हाइना ऐंड अदर शार्ट स्टोरीज’ बहुप्रशंसित। दिल्ली दूरदर्शन के लिए फ़िल्म ‘वारिस’ का निर्माण।
चित्रकला में गहरी अभिरुचि रखने वाली चित्रा ने जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से फाइन आर्ट्स का अध्ययन भी किया है।
-एजेंसियां

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