हिन्दी में जन्‍मदिन: मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के जनक इलाचन्‍द्र जोशी

हिन्दी में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के जनक माने जाने वाले इलाचंन्‍द्र जोशी का आज जन्‍मदिन है। 13 दिसंबर 1903 को तत्‍कालीन उत्तर प्रदेश और आज के उत्तराखंड में जन्‍मे इलाचंन्‍द्र जोशी की मृत्‍यु 1982 में हुई थी। इलाचंन्‍द्र जोशी ने अधिकांश साहित्यकारों की तरह अपनी साहित्यिक यात्रा काव्य-रचना से ही आरम्भ की थी। पर्वतीय-जीवन विशेषकर वनस्पतियों से आच्छादित अल्मोड़ा तथा उसके आस-पास के पर्वत-शिखरों एवं हिमालय के जलप्रपातों एवं घाटियों ने, झीलों और नदियों ने इनकी काव्यात्मक संवेदना को सदा जागृत रखा।
जोशी जी बाल्यकाल से ही प्रतिभा के धनी थे। उत्तरांचल में जन्मे होने के कारण वहाँ के प्राकृतिक वातावरण का इनके चिन्तन पर बहुत प्रभाव पड़ा। अध्ययन में रुचि रखन वाले इलाचन्द्र जोशी ने छोटी उम्र में ही भारतीय महाकाव्यों के साथ-साथ विदेश के प्रमुख कवियों और उपन्यासकारों की रचनाओं का अध्ययन कर लिया था। औपचारिक शिक्षा में रुचि न होने के कारण इनकी स्कूली शिक्षा मैट्रिक के आगे नहीं हो सकी परन्तु स्वाध्याय से ही इन्होंने अनेक भाषाएँ सीखीं। घर का वातावरण छोड़कर इलाचन्द्र जोशी कोलकाता पहुँचे। वहाँ उनका सम्पर्क शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय से हुआ।
मुख्य रचनाएँ
कहानी- ‘धूपरेखा’, ‘आहुति’, उपन्यास- ‘संन्यासी’, ‘परदे की रानी’, ‘मुक्तिपथ’ आदि।
प्रसिद्धि
मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार, काहानीकार, आलोचक
विशेष योगदान
हिन्दी में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों का प्रारम्भ श्री जोशी से ही हुआ, लेकिन श्री जोशी ने मात्र मनोवैज्ञानिक यथार्थ का निरूपण न कर अपनी रचनाओं को आदर्शपरक भी बनाया।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *