पुण्‍यतिथि: प्रसिद्ध भारतीय साहित्‍यकार हजारीप्रसाद द्विवेदी

हिन्दी के प्रसिद्ध निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्‍म 19 अगस्त 1907 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिला अंतर्गत ओझवलिया नामक गाँव में पैदा हुए द्विवेदी का निधन 21 दिसंबर 1938 के दिन रायबरेली में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री अनमोल द्विवेदी और माता का नाम श्रीमती ज्योतिष्मती था। इनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था। इनके पिता पं. अनमोल द्विवेदी संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। द्विवेदी जी के बचपन का नाम वैद्यनाथ द्विवेदी था।
ज्योतिष विषय में आचार्य की उपाधि प्राप्त द्विवेदीजी ने शांति निकेतन में हिन्दी का अध्यापन भी किया।
वहाँ गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर तथा आचार्य क्षितिमोहन सेन के प्रभाव से साहित्य का गहन अध्ययन किया तथा अपना स्वतंत्र लेखन भी व्यवस्थित रूप से आरंभ किया। बीस वर्षों तक शांति निकेतन में अध्यापन के उपरान्त द्विवेदीजी ने जुलाई 1950 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। 1957 में राष्ट्रपति द्वारा ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से सम्मानित किये गये।
कालान्तर में उत्तर प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के अध्यक्ष तथा 1972 से आजीवन उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ के उपाध्यक्ष पद पर रहे। 1973 में ‘आलोक पर्व’ निबन्ध संग्रह के लिए उन्हें ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। 4 फरवरी 1979 को पक्षाघात के शिकार हुए और 19 मई 1979 को ब्रेन ट्यूमर से दिल्ली में उनका निधन हो गया।
उन्होंने बाणभट्ट की आत्मकथा, पुनर्नवा और अनामदास का पोथा जैसे उपन्साय लिखे हैं।
पेश हैं उनके लिखे कुछ विचार-

महान संकल्प ही महान फल का जनक होता है

जीना भी एक कला है, बल्कि कला ही नहीं तपस्या है।

ईमानदारी और बुद्धिमानी के साथ किया हुआ काम कभी व्यर्थ नहीं जाता।

जीतता वह है जिसमें शौर्य,धैर्य,साहस,सत्व और धर्म होता है

जो लोग दूसरो को धोखा देते हैं, वे लोग खुद धोखा खाते हैं और जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं उनके लिए कुआँ तैयार रहता है।

दुनिया बस अपने स्वार्थ की मीत है, बस उतना ही याद रखती है जितना कि उसका स्वार्थ चाहता है।

दही में जितना दूध डालते जाओगे वह दही बनता जायेगा वैसे ही जो लोग शंका करते हैं उनके दिल में हमेशा शंका उत्पन्न होती ही रहती है।

वे लोग ही विचार में निर्भीक हुआ करते हैं जिन लोगों के अन्दर आचरण की दृढ़ता होती है।

बुद्धिमान लोग हमेशा स्वेच्छा से ही सही रास्ते पर चलते हैं।
-Legend News

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *