Dharma को हानि से बचाने के लिए असली महात्मा धर्म रक्षा हेतु आगे आयें

जो देश कभी विश्व का गुरु रहा जो स्वस्थ जीवन यापन, समाज, उन्नति, Dharma, भाई चारे का संदेश देता था आज वही जाति धर्म, क्षेत्र जैसी बीमारी से जुझ रहा है निःसन्देह धर्म पथ होने से रोकता है

भारत का संविधान का अनुच्छेद 19 में प्रत्येक भारतीय नागरिक को वाक की स्वतंत्रता दी गई है हमें यह भी नही भूलना चाहिए कि स्वतंत्रता हमेशा दोहरी होती है अर्थात कुछ कहने की छूट और कुछ न कहने का प्रतिबंध हो, अर्थात् आप ऐसा कुछ भी नहीं कहेंगे जिससे देश की एकता, अखण्डता प्रभावित होती हो, समाज में विघटन पैदा हो पर प्रतिबंध है, अपराध भी है।

विगत कुछ वर्षो मे राजनीति के कर्णधार नेताओं ने ऐसी बोली बोली है जिससे देश की न केवल समरसता बिगड़ी, बल्कि समाज में भी बैरभाव उत्पन्न किया गया है। जिसके परिणाम स्वरुप समाज में भाई चारा पूर्णत; ध्वस्त हो गया है। अब राज के लिए कोई नीति बची नहीं इसीलिए आज की राजनीति दिशा विहोन हो पागलों की तरह व्यवहार कर विक्षिप्त जैसे घूम रहे है और उनकी ये विक्षिप्तता समाज की अवधारण को तोड़ आताताई नए समूहों को निर्माण की और तीव्रगति से अग्रसर हो रहा है।

जो देश कभी विश्व का गुरु रहा जो स्वस्थ जीवन यापन, समाज, उन्नति, Dharma, भाई चारे का संदेश देता था आज वही जाति धर्म, क्षेत्र जैसी बीमारी से जुझ रहा है निःसन्देह धर्म पथ होने से रोकता है, अध्यात्म मे और परमात्मा मनुष्य के जीवन की विकास की सम्भावनाओं को बताता है। अध्यात्म में मनुष्य का अधिकतम विकास स्वंय ईश्वर हो जाना जाता है। निःसन्देह बुद्धि भक्ति का नाश करती है क्यों कि बुद्धि जीती ही हे तर्क के सहारे! लेकिन जब बुद्धि कुबुद्धि में बदल जाये तो पूरी मनुष्य जाति खतरे में पड़ जाती है।

भगवान भी ऐसे कुबुद्धि वाले से बचता फिरता है आज कल अलग अलग भेष में कई ऐसे लोगो की संख्या में तीव्रता से वृद्धि हो रही है जिन्होने इन्सान तो इंसान भगवान भी जाति का जहर घोलना प्रारंभ कर दिया है इस दुनिया में दो तरह के इंसान है एक नास्तिक दूसरा आस्तिक नास्तिक तो स्पष्ट है कोई दिखावा भी नहीं है खुली किताब भी है इसमें आस्तिक होने की संभावना हमेशा बनी ही रहती है लेकिन, जो आस्तिक वह है एक मायने में ज्यादा खतरनाक है ।

ऐसे लोगो को आस्तिकता की आड़ में पाप करने की खुली छूट मिल जाती है! साधू के भेष में शैतान फलता-फूलता रहता है। यू ंतो साधू संतो को संसार, मोह, माया, अंहकार से क्या लेना देना? लेकिन, फिर भी कुछ इससे जकड़े ही बंधे ही नजर आते है ऐसे लोग दिखते कुछ, दिखाते कुछ, लेकिन अंदर से सर्वथा भिन्न होते है आजकल कुबुद्धि वाले कुछ लोग अपनें को प्रचारित करने, अपनी असलियत को बताने के लिए भगवान के आस्तित्व एवं भगवान की ही जाति बताने पर धरती आसमाॅ एक किये हुए है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री जनता और जनता के मुद्वो को छोड़ रामभक्त श्री हनुमान को दलित वनवासी गिरवासी बता समाज को क्या संदेश देना चाहते है। ये तो वो स्वंय ही जानते क्योंकि बाहर से उनके अंदर झांकने का अभी तक कोई विज्ञान नहीं आया! इनकी देखा देखी भीड़ तंत्र की भेड़ो में बढ़ चढ़ कर श्री हनुमान जी को ले बयान बाजी जारी है राष्टीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय राम भक्त हनुमान को आदिवासी बता रहे है। बागपत से भाजपा सांसद कहते है भगवान राम के समय जाति व्यवस्था नही थी लेकिन राम भक्त श्री हनुमान जी को आर्य बताने से भी नहीं चूकते दलितों ने भी श्री हनुमान जी के मुद्वे को लपकते हुए अपना कुल देवता बता पूजा अर्चना भी शुरु कर दी है।

मंदिर पुजारियों के विरुद्ध एक अभियान सा छोड़ दिया है भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर तो अब कह रहे है कि हनुमान मंदिरो की कमान दलित पुजारियों के हाथ में दे नियुक्ति करना चाहिए। उत्तर प्रदेश की भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले ने तो भगवान राम को ही मनुवादी बना दिया है, ये हिन्दु धर्म ही है जिसमें उसके अराध्य पर कोई भी मनचाही टिप्पणी कर देता है जबकि अन्य धर्म में ईश निंदा करने के अपराध में कई फतवे जारी हो जाते हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती ने श्री हनुमान जी महाराज को बा्रहाण बताया और उन्होंने तर्क भी दिया त्रेता युग में दलित शब्द था ही नहीं निःसन्देह मायावती ने ही दलित शब्द का प्रयोग किया। बाबा रामदेव भी श्री हनुमान जी को बा्रहाण ही मानते है यू शास्त्रों में उनकी जाति का कोई उल्लेख देखने को नहीं मिलता पहले गुण कर्म के आधार पर ही वर्ग विभाजन था ।

भारतीय संस्कृति में भी जन्म के आधार पर कोई जाति की व्यवस्था नही थी बल्कि कर्म आधारित हो रही है, लेकिन राजनीति जो न कराये सो थोड़ा ही है जन्म आधारित की व्यवस्था राजनीति की ही देन है। जिस हिसाब से कुर्तक का चलन चल निकला है कोई बड़ी बात नहीं कल श्री विष्णु के विभिन्न अवतारों के आधार पर कहीं उन्हें कोई जाति में न बांध दे, भगवान शिव, गणेश, कार्तिकेय एवं अन्य तैतीस करोड़ देवी देवता भी है। बहरहाल जो भी हो भगवान को इस जाति के झमेले से दूर ही रखना चाहिए। निःसंदेह परमात्मा अखण्ड है हम खण्ड-खण्ड है इसलिए हमारी सोच भी वैसी ही है उतनी बुद्धि ही नही है उस अखण्ड को सीमाओं में, जाति में बांधना ही मूर्खता है। अब वक्त आ गया है धर्म को हानि से बचाने के लिए असली महात्मा धर्म रक्षा हेतु आगे आयें।

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डॉ. शशि तिवारी,
शशि फीचर.ओ.आर.जी.,लेखिका सूचना मंत्र की संपादक हैं

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