NRC का विरोध करने असम पहुंचे टीएमसी के सांसद और विधायक हिरासत में

गुवाहाटी। असम में जारी NRC पर संसद से सड़क पर जारी संग्राम गुरुवार को असम भी पहुंच गया। NRC का विरोध कर रही टीएमसी के 6 सांसद और दो विधायक को असम के सिलचर एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लिए जाने के बाद तृणमूल नेताओं का कहना है कि वे एयरपोर्ट छोड़कर नहीं जाएंगे। उधर, कहा जा रहा है कि इन नेताओं को अगली उड़ान से वापस भेजा जा सकता है। टीएमसी के नेताओं का आरोप है कि उन्‍हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन उन्‍हें जबरन हिरासत में ले लिया गया।
टीएमसी के वरिष्‍ठ नेताओं ने असम सरकार के इस कदम की आलोचना की है। तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन ने आरोप लगाया कि सिलचर एयरपोर्ट पर उनके नेताओं के साथ बदसलूकी की गई। उन्‍होंने कहा कि हिरासत में लिए गए सभी लोग जन प्रतिनिधि हैं। तृणमूल नेताओं ने कानून का उल्‍लंघन नहीं किया है। लोगों से मिलना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्‍होंने कहा कि सिलचर में इस समय सुपर इमरजेंसी लगी हुई है। उधर, सरकार का कहना है कि इलाके में धारा 144 लगी हुई और इसी वजह उन्‍हें हिरासत में लिया गया है। जिन नेताओं को हिरासत में लिया गया है उनमें पश्चिम बंगाल के मंत्री सिराज हकीम, राज्‍यसभा के दो और लोकसभा के चार सांसद हैं।
ब्रायन ने बताया कि यह आठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल एनआरसी ड्राफ्ट से बाहर किए गए लोगों से मिलने गया था। तृणमूल ने इस मामले को संसद में भी उठाया है और सरकार से जवाब मांगा है। ब्रायन ने कहा कि टीएमसी ने नोटिस देकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है लेकिन वह आए नहीं। बता दें कि यह गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई जब NRC के मुद्दे पर टीएमसी और बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
ममता बनर्जी का दोहरा चरित्र भी सामने आया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) के मसले पर मोदी सरकार के खिलाफ हमलावर हैं। ममता ने बीजेपी पर धर्म के नाम पर देश बांटने की साजिश करने का आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया है कि इस तरह के कदमों से देश में रक्तपात होगा और गृहयुद्ध की स्थिति आ जाएगी लेकिन 2005 में खुद ममता बनर्जी बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को लेकर संसद में हंगामा कर चुकी हैं। उस दौरान ममता ने स्पीकर पोडियम पर न केवल पेपर फेंका था, बल्कि इस मुद्दे पर लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा भी की थी। हालांकि यह बात अलग है कि तब पश्चिम बंगाल में टीएमसी की नहीं बल्कि लेफ्ट की सरकार हुआ करती थी।
इसी बीच बीजेपी ने तृणमूल चीफ को बांग्लादेशी घुसपैठियों पर उनका पुराना स्टैंड याद दिलाया है। इसकी शुरुआत केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने की है। जेटली ने एक ट्वीट कर पूछा है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ने 4 अगस्त 2005 को लोकसभा में कहा था, ‘बंगाल में होने वाली घुसपैठ अब त्रासदी बन गई है। मेरे पास बांग्लादेशी और भारतीय वोटर्स दोनों की लिस्ट है। यह बेहद गंभीर मामला है। मैं यह जानना चाहूंगी कि सदन में इस पर कब चर्चा होगी।’
-एजेंसी

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