राम मंदिर पर समझौते का समय बीत गया, अब कानून बनाकर ही होगा मंदिर निर्माण: स्‍वामी रामदेव

वाराणसी। राम मंदिर निर्माण के लिए सुलह-समझौते को दौर निकल चुका है। अब मंदिर निर्माण में अगर देरी हुई तो देश का माहौल बिगड़ सकता है। यह कहना है योग गुरु बाबा रामदेव का, वह दो दिन के दौरे पर वाराणसी में हैं। शुक्रवार एक आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अगर अब राम मंदिर का निर्माण नहीं हो पाता है या इसमें देरी होती है तो देश का साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर विरोध किसी भी दल का राजनीतिक हो सकता है, लेकिन भगवान राम किसी के लिए विरोध की बात नहीं हैं।
अगले साल आम चुनाव से पहले देश में फिर राम मंदिर का मुद्दा फिर गरमाने के पीछे सियासी कारण तो नहीं है?
इस सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि राम मंदिर मुद्दे पर राजनीतिक स्तर पर चल रही बेवजह की बयानबाजी से राजनीति में संस्कृति और संस्कार क्षीण हो रहा है। भगवान राम के जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर किसी भी राजनीतिक दल के बड़े नेता या छोटे नेता को सोच समझकर ही बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में मौलिक अधिकारों की बात हो रही है, लेकिन दूसरी तरफ हमारे संवैधानिक और नैतिक कर्तव्यों का उपहास हो रहा है इसलिए इस मसले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को बहुत गंभीरता से सोचना चाहिए।
सुलह-समझौते का खत्म हो चुका है दौर
आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर की तरफ से राम मंदिर को लेकर सुलह-समझौते के प्रयास को खारिज करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि अब इसका दौर खत्म हो चुका है। अब एक ही विकल्प बचा है, संसद में कानून बनाकर मंदिर जल्दी से जल्दी बनाओ। उन्होंने कहा कि अभी नहीं तो कभी नहीं, इसी दिशा में कार्य करना होगा। बाबा रामदेव ने कहा कि हिंदुस्तान में हिंदू और मुसलमान किसी को कोई खतरा नहीं है, क्योंकि अहिंसा और प्रेम यह हमारी संस्कृति के मूल तत्व हैं। मजहबी उन्माद राष्ट्र में नहीं हैं, लेकिन यदि राम मंदिर नहीं बना तो देश में एक सांप्रदायिक माहौल जरूर बनेगा और इससे समायोजित वैमनस्यता से देश में नुकसान होने की आशंका है।
बाबा रामदेव ने कहा कि राम मंदिर बनाने के लिए कानून या अध्यादेश जो भी हो, संसद में तुरंत बनना चाहिए। अब 25 वर्ष से भी ज्यादा हो चुके हैं। एक गंभीर संघर्ष और सैकड़ों वर्ष बीत गए इस पूरे मुकदमे के, लेकिन अभी नहीं तो कब यह निर्णय होगा इसलिए संसद अंतिम आस है और इसमें यह अध्यादेश या कानून हर हाल में आना चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लगातार देरी की बातों पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की अपनी हदें हैं, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भी कह चुके हैं कि इस बात के लिए संसद स्वतंत्र है और संसद से ऊपर कोई नहीं होता इसलिए मंदिर बनाने का रास्ता उनको साफ करना चाहिए।
कालाधन मुद्दे पर बाबा रामदेव ने साधी चुप्पी
काला धन को भारत वापस लाए जाने के मुद्दे पर बाबा रामदेव ने कोई जवाब नहीं दिया। राहुल गांधी की तरफ से लगातार राफेल मुद्दे पर बोले जाने को लेकर बाबा रामदेव ने कहा कि राजनीति में एक दूसरे पर छींटाकशी होती रहती है। मैं पक्ष-विपक्ष के मुद्दों में नहीं पड़ना चाहता हूं। मैं सर्वदलीय और निर्दलीय हूं।
-एजेंसियां

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