संस्कृति विवि में होगा Faculty Development प्रोग्राम

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय 3  दिवसीय Faculty Development प्रोग्राम का आयोजन अगले हफ्ते करने जा रहा है। संस्कृति विश्वविद्यालय ने काफी संख्या में नए उच्च स्तरीय प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षकों को बहाल कर  उनकी संख्या में आशातीत वृद्धि की है ताकि छात्रों को उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुचारु रूप से देने की परम्परा निर्बाध गति से जारी रह सके।
3  दिवसीय Faculty Development प्रोग्राम  में मुख्य वक्ता के तौर पर सेवा निवृत ब्रिगेडियर डॉ. सुनील मौदगिल को आमंत्रित किया गया है जो कि अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त  प्रशिक्षक और मोटिवेटर के रूप में जाने जाते हैं।  इस कार्यशाला का आयोजन प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षकों को शिक्षा में हो रहे बदलावों, नई शिक्षण विधियों, इफेक्टिव टीचिंग के गुर, शिक्षण प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी का समावेश, स्टूडेंट इंगेजमेंट, मोटिवेशन, पीडागोगी, शोध एवं प्रकाशन इत्यादि विषयों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए किया गया है ।
Faculty Development प्रोग्राम को लेकर कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने अपने विशेष सन्देश में कहा कि विश्वविद्यालयों में अध्यापनरत प्राध्यापकों का राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान रहता है। संस्कृति विश्वविद्यालय समय-समय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम  का आयोजन कर प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षकों को शिक्षा में नई तकनीकों से अवगत करा कर उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।  इस Faculty Development प्रोग्राम में सभी  प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षकों का प्रतिभाग करना नितांत आवश्यक है।
उप कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने अपने सन्देश में कहा की प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अंतर्गत आने वाले बदलावों से अवगत होकर तथा तेजी से बदल रहे आर्थिक परिदृश्य में औद्योगिक घरानों की  छात्रों से उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए नयी एवं इन्नोवेटिव तकनीकों को इस्तेमाल कर छात्रों को रोजगार परक एवं आउटकम बेस्ड उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहना पड़ेगा ताकि छात्रों का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
कुलपति डॉ. राणा सिंह ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय छात्रों के सर्वांगीण विकास एवं एवं समेकित शिक्षा  प्रदान करने के लिए सभी प्राध्यापकों एवं प्रशिक्षकों  के चयन, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देता है ताकि कुशल एवं प्रशिक्षित प्राध्यापकगण  एवं प्रशिक्षकगण छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा एवं मार्ग दर्शन में सक्षम हो सकें।

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