ट्रांसफर-पोस्टिंग डील: UPSTF ने गिरफ्तार क‍िए पत्रकार समेत 3 लोग

लखनऊ। योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के ख‍िलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जहां ट्रांसफर-पोस्टिंग के फर्जीवाड़ा मामले में आबकारी विभाग के विशेष सचिव ईश्वरचंद्र पांडेय को उनके पद से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया है, वहीं ट्रांसफर-पोस्टिंग सौदे में डील करने वाले पत्रकार समेत तीन लोगों को UPSTF ने थाना क्षेत्र विभूतिखंड जनपद लखनऊ से गिरफ्तार कर ल‍िया है।

सूत्रों के मुताबिक कानपुर विकास प्राधिकरण में वीसी का पद दिलवाने के नाम पर आईएएस अधिकारी से 1.25 करोड़ की डील करने का मामला सामने आने के बाद से ही शासन-प्रशासन में खलबली मची हुई थी। इसमें आईएएस ईश्वरचंद्र पांडेय का नाम पिछले दिनों ट्रांसफर पोस्टिंग के सौदे में उछला था, ज‍िसमें दो लोगों के बीच का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद शासन ने इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी। एसटीएफ ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही शासन ने आईएएस पांडेय पर कार्रवाई की है।

लॉकडाउन के चलते नहीं हो पाई थी तैनाती

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पूरे देश में लॉकडाउन घोषित है। इस बीच कानपुर विकास प्राधिकरण में वीसी का पद दिलवाने के नाम पर आईएएस अधिकारी से 1.25 करोड़ की डील करने वाले गाजियाबाद के कथित पत्रकार पीयूष अग्रवाल, गौरीकांत व कमलेश को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है।

यूपी एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि बीते दिनों एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसमें एक आईएएस अधिकारी को कानपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाने की बात चल रही थी और इस बाबत 1.25 करोड़ रुपए में डील और 15 लाख रुपए एडवांस लिए जाने का भी जिक्र था। एसटीएफ ने इस मामले में गाजियाबाद के रहने वाले गौरीकांत दीक्षित और लखनऊ के कमलेश सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया है।

पीयूष अग्रवाल इस गिरोह का सरगना

गौरतलब है क‍ि पीयूष अग्रवाल ट्रांसफर पोस्टिंग गिरोह का सरगना है। एसटीएफ की पूछताछ में गौरीकांत दीक्षित ने बताया कि वो और पीयूष अग्रवाल गाजियाबाद की एक ही सोसाइटी में रहते हैं। दीक्षित ने बताया कि पीयूष अग्रवाल सामाजिक कार्यकर्ता और एक चैनल का पत्रकार है, दोनों मिलकर अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग कराने के नाम पर ठगी का काम करते हैं।

लखनऊ के कमलेश सिंह से एक आईएएस अफसर को कानपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनवाने की 1.25 करोड़ रुपए में डील हुई थी और 25 लाख रुपए हम तीनों को आपस में बांटने थे।

गौरीकांत ने वायरल किया ऑडियो
2 मार्च को इस काम के लिए एडवांस के तौर पर कमलेश ने पीयूष अग्रवाल को 15 लाख रुपए दिए थे, जिसमें से पीयूष ने 2 लाख रुपए कमलेश को नगद दिए। 2 लाख रुपए गौरीकांत के अकाउंट में ट्रांसफर किया, बाकी 11 लाख रुपए लेकर वह गाजियाबाद चला गया था, लेकिन उसके बाद ही लॉकडाउन हो गया और पीयूष अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके पोस्टिंग नहीं करा पाया। इधर, कमलेश ने पोस्टिंग नहीं होने पर गौरीकांत और पीयूष ने तगादा शुरू कर दिया। गौरीकांत के कहने पर कमलेश ने पीयूष को फोन किया और दोनों के बीच हुई पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया, जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग और पैसों के लेनदेन का ज़िक्र था। उस ऑडियो क्लिप को गौरीकांत ने वायरल करा दिया, जो पुलिस, प्रशासन तक पहुंच गई। इसके बाद गिरोह का भंडाफोड़ हुआ और तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक अब वो आईएएस अफसर भी जांच के घेरे में हैं, जिनको केडीए वीसी बनाने की डील हुई थी।
– Legend News

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