वेदों का मजाक उड़ाने वालों को जवाब है Hammeroff का शोध

जो व्‍यक्‍ति अथवा समाज अपने अतीत को विस्‍मृत कर देता है वह अपने वर्तमान का ध्‍वंस तो करता ही है, भविष्‍य का भी अपराधी होता है। हम वेदों द्वारा सौंपे गए ज्ञान को भुलाकर यही अपराध लगातार करते रहे परंतु अब ये तस्‍वीर उलट रही है और इस पर गर्व करने की बारी हमारी है, वह भी प्रमाणों के साथ। अब भौतिकी के क्वाटंम सिद्धांत पर आधारित शोधों के बाद वैज्ञानिक ये सिद्ध करने में सफल हुए हैं कि आत्‍मा अजर व अमर है।

आधुनिक विज्ञान की आधारशिला बने ब्रह्मांडीय अध्‍ययन के साथ साथ शरीर विज्ञान के अध्‍ययन ये बताने को काफी हैं कि जो कुछ हमारे ऋषि-मुनि अपने ज्ञान से बताकर गए वह न केवल सत्‍य है बल्‍कि प्रमाणिक भी था और सदैव रहेगा।

हाल ही में ऑक्‍सफोर्ड यूनीवर्सिटी के गणित व भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर सर रोगर पेनरोज तथा यूनीवर्सिटी ऑफ एरीजाना के भौतिक वैज्ञानिक Dr. Stuart Hameroff ने 20 साल तक किए अनेक शोधों के बाद निष्‍कर्ष निकाला कि आत्‍मा अजर अमर है। इस बारे में इन्‍होंने कुल 6 शोधपत्र प्रकाशित किए हैं और इसपर अमेरिकी साइंस चैनल में डॉक्‍युमेंटरी भी जल्‍द ही दिखाई जाएगी।

शोधकर्ता प्रोफेसर सर रोगर पेनरोज तथा डा. स्‍टुअर्ट Hammeroff का कहना है कि मानव मस्तिष्क एक जैविक कंप्यूटर की भांति है। इस जैविक कंप्यूटर का प्रोग्राम चेतना या आत्मा है जो मस्तिष्क के अंदर मौजूद एक क्वांटम कंप्यूटर के जरिये संचालित होती है। क्वांटम कंप्यूटर से तात्पर्य मस्तिष्क की कोशिकाओं में स्थित सूक्ष्म नलिकाओं से है जो प्रोटीन आधारित अणुओं से निर्मित हैं। बड़ी संख्या में ऊर्जा के ये सूक्ष्म स्रोत अणु मिलकर एक क्वाटंम स्टेट तैयार करते हैं जो वास्तव में चेतना या आत्मा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, जब व्यक्ति दिमागी रूप से मृत होने लगता है तब ये सूक्ष्म नलिकाएं क्वांटम स्टेट खोने लगती हैं। सूक्ष्म ऊर्जा कण मस्तिष्क की नलिकाओं से निकल ब्रह्मांड में चले जाते हैं। कभी मरता इंसान जिंदा हो उठता है, तब ये कण वापस सूक्ष्म नलिकाओं में लौट जाते हैं। आत्मा चेतन दिमाग की कोशिकाओं में प्रोटीन से बनी नलिकाओं में ऊर्जा के सूक्ष्म स्रोत अणुओं एवं उपअणुओं के रूप में रहती है। सूचनाएं इन्हीं सूक्ष्म कणों में संग्रहित रहती हैं।
शोध के अनुसार सूक्ष्म ऊर्जा कणों के ब्रह्मांड में जाने के बावजूद उनमें निहित सूचनाएं नष्ट नहीं होती। क्वाटंम सिद्धांत प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिक मैक्स प्लंक के नाम पर म्यूनिख में प्लंक इंस्टीट्यूट है, वहां के वैज्ञानिक हेंस पीटर टुर ने भी इसकी पुष्टि की है।

भारतीय वैदिक ज्ञान परंपरा पर सवाल उठाने वालों और इसे पोंगापंथी बताने वालों के लिए भौतिकी के क्वाटंम सिद्धांत पर आधारित यह शोध एक सबक है क्‍योंकि वाे भारतीय ज्ञान परंपरा में हुए ब्रह्मांडीय प्रयोगों को कमतर आंकते रहे और हर तथ्‍य को पोंगापंथ कहकर परे धकेलते रहे। वेदों के ज्ञान से भरे हुए हमारे अतीत को आज फिर से उसी प्रतिष्‍ठा के लिए याद करने का समय है।

जैसे कि पुरुषसूक्‍त, ऋग्वेद. 10.90.2 में कहा गया है-

पुरुष एव इदं सर्वं यद् भूतं यच्च भव्यम्।
उतामृतत्वस्य ईशानो यद् अन्नेन अतिरोहति।।

अर्थात्
इस सृष्टि में जो कुछ भी इस समय विद्यमान है, जो अब तक हो चुका है और आगे जो भविष्य में होगा, वह सब पुरुष (परमात्मा) ही है। वह पुरुष उस अमरत्व का भी स्वामी है, जो इस दृश्यमान भौतिक जगत के ऊपर है।

आज का विज्ञान भी मानता है कि इस दृश्यमान जगत के अंदर की सच्चाई इसके ऊपर से दिखने वाले रूप से सर्वथा भिन्न है। ऋग्‍वेद का संदेश आत्‍मा निरंतरता व अमरता को समझने के लिए काफी था जिसे अब प्रोफेसर सर रोगर पेनरोज व डा. स्‍टुअर्ट हैमरॉफ द्वारा क्‍वांटम कंप्‍यूटिंग व मैकेनिज्‍म से प्रमाणित किया जा रहा है।

– सुमित्रा सिंह चतुर्वेदी

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