Prakash Parv पर करतारपुर साहिब जाने वालों के ल‍िए नियम

नई द‍िल्ली। 550वें Prakash Parv पर पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब के दर्शन करने हेतु जाने के लिए श्रद्धालुओं को कुछ नियमों व शर्तों का पालन करना होगा। ऐतिहासिक करतापुर कॉरिडोर का उद्घाटन हो चुका है। इसके साथ ही करतारपुर साहिब तक जाने का रास्ता भी खुल गया। कॉरिडोर में भारत की तरफ से 3.8 किमी लंबी सड़क बनाई गई है।

पाकिस्तान की तरफ की सड़क चार किमी लंबी है और एक इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बनी है। भारत की ओर 300 फीट ऊंचा तिरंगा झंडा लगाया गया है, जो 5 किमी दूर तक दिखाई देगा। पाकिस्तान की तरफ से भारत से और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। साथ ही कुछ नियम भी निर्धारित किए गए हैं। जैसे–

दर्शन के लिए साढ़े चार किलोमीटर का रास्ता, करनी होगी दो बसों की सवारी
पाकिस्तान सरकार गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में नतमस्तक होने के लिए भारत से आने वाले श्रद्धालुओं को मुफ्त बस सेवा उपलब्ध करवाएगी। डेरा बाबा नानक से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के बीच साढ़े चार किलोमीटर का रास्ता है। लाल रंग की बसें यात्रियों को जीरो लाइन से लेकर करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते गुरुद्वारा तक पहुंचाएगी। वहां से हरे रंग की बस में संगत को बैठा कर ड्योढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।

लाल रंग की बसों पर एक तरफ श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा का चित्र और दूसरी तरफ अंग्रेजी में लिखा गया है वेलकम टू श्री करतारपुर साहिब। यह लाल रंग की बसें करतारपुर कॉरिडोर से लेकर भारतीय सीमा तक आती-जाती रहेंगी। ड्योढ़ी तक जाने के लिए जो हरे रंग की जो बसें लगाई गई हैं, वह बिल्कुल ओपन हैं।

14 साल से 70 साल तक के श्रद्धालु ही पवित्र यात्रा पर जा सकते हैं

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने की पहली शर्त उम्र की है। 14 साल से 70 साल तक के श्रद्धालु ही पवित्र यात्रा पर जा सकते हैं। गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के खुले दर्शन के लिए कॉरिडोर पूरे साल खुला रहेगा। हर रोज करीब 5000 श्रद्धालु दर्शन करने जा सकेंगे। इसके लिए वीजा की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पासपोर्ट जरूरी होगा। लेकिन खास शर्त यह है कि अगर श्रद्धालु कॉरिडोर से गए तो फिर करतारपुर साहिब से आगे नहीं जा सकेंगे।

इसके अलावा श्रद्धालुओं को उसी दिन शाम तक वापस आना होगा। श्रद्धालु अपने साथ सात किलो से ज्यादा वजन का सामान नहीं ले जा सकते। यात्रा के दौरान 11,000 रुपये से ज्यादा की भारतीय मुद्रा भी अपने पास नहीं रख सकते हैं। श्रद्धालुओं को सिक्के ले जाने की भी इजाजत नहीं है। श्रद्धालुओं को दर्शनार्थ जाने के लिए अनुमति लेनी होगी और निर्धारित शुल्क भरना होगा। हर श्रद्धालु को 20 डॉलर यानी 1400 रुपये का शुल्क देना होगा।

तीर्थयात्रा के दौरान पर्यावरण के अनुकूल सामग्री (जैसे कपड़े के बैग) का इस्तेमाल करना होगा और क्षेत्र की स्वच्छता को बनाए रखना होगा। पॉलीथीन बैग पर पूर्ण पाबंदी है। गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक में पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स (पीटीबी) के भीतर धूम्रपान, मदिरा-पान और तंबाकू के इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी। तेज आवाज में संगीत बजाना और बिना अनुमति अन्य लोगों की तस्वीरें लेने की मंजूरी भी नहीं होगी।

श्रद्धालु अपने साथ वाई-फाई, ब्रॉडबैंड उपकरण, भारत या पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने वाले झंडे-बैनर, शराब अपने साथ नहीं ले जा सकेंगे। इन वस्तुओं को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है। आग्नेयास्त्र और गोला बारूद, विस्फोटक पदार्थ, मादक पदार्थ, चाकू और ब्लेड, जाली नोट, मोहर और सिक्के, भारत और पाकिस्तान की बाहरी सीमाओं के गलत चित्रण वाले मानचित्र और साहित्य ले जाने पर मनाही है। सभी प्रकार के कृपाणों को ले जाने की इजाजत है।

एफआईए रखेगी भारतीय श्रद्धालुओं का हिसाब
करतारपुर साहिब के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को दरबार साहिब में रुकने नहीं दिया जाएगा। पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए हर रोज आने वाले पांच हजार तीर्थयात्रियों की तीव्र निकासी के लिए करतारपुर कॉरिडोर के मुख्य टर्मिनल में 80 इमीग्रेशन (आप्रवासन) काउंटर स्थापित किए हैं। इन काउंटर पर तैनात अधिकारियों पर यात्रियों के पासपोर्ट की जांच के साथ-साथ उन्हें गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के लिए एक यात्रा कार्ड जारी करने की भी जिम्मेदारी होगी। पाक की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) इसी काउंटर से भारत सरकार द्वारा भेजी गई यात्रियों की सूची की जांच करेगी।

– एजेंसी

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