यह हार-जीत का विषय नहीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्‍वागतयोग्‍य: टाटा

नई दिल्‍ली। टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री के साथ विवाद के मामले में शुक्रवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें सायरस मिस्त्री को फिर से टाटा समूह का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का आदेश दिया गया था। रतन टाटा ने इस फैसले को टाटा समूह की अखंडता और नैतिकता पर मुहर बताया और न्यायालय का आभार जताया।
टाटा ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, ‘मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले की सराहना करता हूं और मैं न्यायालय का आभारी हूं। यह हार और जीत का विषय नहीं है। मेरी ईमानदारी और समूह के नैतिक आचरण पर लगातार हमले किए गए। फैसले ने टाटा समूह के मूल्यों और नैतिकता पर मुहर लगाई है, जो हमेशा से समूह के मार्गदर्शक सिद्धान्त रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि इस फैसले ने न्यायपालिका की निष्पक्षता को और मजबूत किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने साढ़े चार साल पुराना टाटा-मिस्त्री विवाद में शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाने के कदम को सही माना लेकिन साथ ही कहा कि शेयर से जुड़े मामले को टाटा और मिस्त्री दोनों ग्रुप मिलकर सुलझाएं। टाटा संस प्राइवेट लि. और साइरस इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लि. ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ क्रॉस अपील दायर की थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया। एनसीएलएटी ने अपने आदेश में 100 अरब डॉलर के टाटा समूह में साइरस मिस्त्री मिस्त्री को कार्यकारी चेयरमैन पद पर बहाल कर दिया था।
टाटा ग्रुप की दलील
मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले साल 17 दिसंबर को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह ने 17 दिसंबर को न्यायालय से कहा था कि अक्टूबर, 2016 को हुई बोर्ड की बैठक में मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाना ‘खूनी खेल’ और ‘घात’ लगाकर किया गया हमला था। यह कंपनी संचालन के सिद्धान्तों के खिलाफ था। वहीं टाटा समूह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि इसमें कुछ भी गलत नहीं था और बोर्ड ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मिस्त्री को पद से हटाया था।
टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी
शापूरजी पालोनजी समूह की टाटा संस में 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है। पालोनजी मिस्त्री के बेटे साइरस मिस्त्री को 2012 में रतन टाटा की जगह टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन चार साल बाद 2016 में उन्हें अचानक पद से हटा दिया गया था। तभी से उनकी टाटा समूह के साथ ठनी हुई है। टाटा समूह ने एसपी समूह की हिस्सेदारी खुद खरीदने का प्रस्ताव दिया था, जिसके लिए मिस्त्री परिवार तैयार नहीं है। इसके बाद टाटा समूह ने 5 सितंबर को एसपी समूह को अपने हिस्से के शेयर बेचने या गिरवी रखने से रोकने के लिए शीर्ष अदालत की शरण ली थी।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *