भारत और चीन के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा अमेरिका का यह कदम

नई दिल्‍ली। वेनेजुएला अभी राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप वहां के राष्ट्रपित मादुरो के खिलाफ हैं। इतना खिलाफ कि वह वेनेजुएला पर बैन लगाने की तैयारी में हैं। इसका मतलब होगा कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर देंगी। अगर ऐसा होता है तो यह भारत और चीन के लिए फायदेमंद साबित होगा।
अगर अमेरिका वेनेजुएला पर बैन लगाने का फैसला करता है तो वेनेजुएला से सबसे ज्यादा तेल लेने वाली अमेरिकी रिफाइनरियों को वहां से तेल की खरीददारी बंद करनी होगी। इससे ओपेक में शामिल इस देश से दूसरे बड़े ग्राहकों, भारत और चीन के लिए ज्यादा तेल उपलब्ध होगा। तेल की अतिरिक्त सप्लाई के चलते भारत-चीन जैसे देशों को कम कीमत में तेल खरीदने का मौका मिलेगा।
अमेरिका से बैन होने की स्थिति में वेनेजुएला भी चाहेगा कि एशियाई देशों को अपने ग्राहक के तौर पर बनाए रखे, खासकर ऐसी स्थिति में जबकि उस लैटिन अमेरिकी देश से दक्षिण कोरिया और जापान जैसे बड़े क्रूड ऑइल खरीदारों ने खरीदारी बंद कर दी है। अभी चीन और भारत ने भी वेनेजुएला से तेल का आयात घटाया हुआ है। वेनेजुएला के पास सऊदी अरब से ज्यादा तेल भंडार है लेकिन तेल की प्रकृत्ति भारी होने के कारण इसे रिफाइन करने में ज्यादा खर्च आता है। इस वजह से वहां की तेल कंपनियों के सरकारीकरण के बाद भी तेल उत्पादन औसत से कम हो रहा है।
वेनेजुएला में सोने और हीरे की खदानें भी हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था पूरी तरह तेल पर ही टिकी है। सरकार की 95% इनकम तेल से ही होती रही। 1998 में राष्ट्रपति बने ह्यूगो शावेज ने लंबे समय तक कुर्सी पर बने रहने के लिए देश के सिस्टम में तमाम बदलाव किए। सरकारी और राजनीतिक बदलावों के अलावा शावेज ने उद्योगों का सरकारीकरण किया, प्राइवेट सेक्टर के खिलाफ हल्ला बोल दिया, पैसा कम पड़ा तो खूब कर्ज लिए और धीरे-धीरे देश कर्ज में डूबता चला गया। तेल कंपनियों से पैसा लेकर जरूरतमंद तबके पर खुलकर खर्च करने से शावेज मसीहा तो बन गए, लेकिन वेनेजुएला की इकॉनमी में दीमक लग गया। अब अगर ट्रंप पाबंदी के फैसले को अंजाम देते हैं तो वेनेजुएला की भारत और चीन जैसे तेल आयातकों पर निर्भरता बढ़ जाएगी।
-एजेंसियां

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