Akshaya Tritiya पर इस बार बन रहा अदभुत संयोग

इस बार सात मई विशेष संयोग लेकर आ रही है, जी हां सनातन धर्म में वैशाख शुक्ल तृतीया को Akshaya Tritiya के रूप में मनाया जाता है और यही Akshaya Tritiya छह-सात मई की सुबह 3.22 बजे से प्रारंभ होकर सात -आठ मई की सुबह 2.20 बजे तक रहेगी।

इस बार यह तिथि बेहद शुभ संयोग संजोए है। स्थिर योग इसे बेहद खास बना रहा है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो अक्षय तृतीया व स्थिर योग के संयुगमन से तिथि विशेष में व्रत-पर्व-दान और भी पुण्य फलदायी होगा।

मिलता है अक्षय पुण्य

मान्यता है कि इस तिथि में दान,स्नान होम-जप आदि कर्मों का फल अक्षय होता है। अक्षय पुण्य की दृष्टि से ही इस तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस दिन स्वर्ण खरीदने पर वह भी अक्षय हो जाता है। स्वर्ण खरीदारी का शुभ समय दोपहर 12.20 बजे से 2.24 बजे तक है। वैसे इस दिन कभी भी खरीदारी की जा सकती है।

सोना खरीदने का है विधान

अक्षय तृतीया के दिन सोना अथवा चांदी के आभूषण खरीदने का विधान है। कई लोग घर में बरकत के लिए इस दिन सोने या चांदी की लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखते और उसकी नियमित पूजा करते हैं। साथ ही इस दिन पितरों की प्रसन्नता और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए किसी ब्राह्मण को जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा, फल, शक्कर, घी आदि दान करने चाहिए। चूंकि कन्या दान सभी दानों में महत्वपूर्ण बताया गया है, इसलिए इस दिन लोग शादी-विवाह का विशेष आयोजन करते हैं।

होती है अक्षय समृद्धि

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद शंकर व्यास बताते हैं कि अक्षय तृतीया खरीदी के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त है। इस दिन सोना, चांदी, वस्त्र और बर्तन खरीदने का विशेष महत्व है। इस बार रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि का चंद्रमा मुहूर्त को और विशेषता प्रदान कर रहा है। इस दिन दान का भी बहुत महत्व है इसलिए कई लोग

कन्यादान के लिए भी अक्षय तृतीया का दिन चुनते हैं। दान के लिए भी इस दिन खरीदी करना श्रेष्ठ माना गया है। अखंड समृद्धि मिलती है। ज्योतिषाचार्य अमर डब्बावाला के अनुसार अक्षय तृतीया पर खरीदी को लेकर किसी शास्त्र में कोई विशेष बात नहीं की गई है। मगर यह मान्यता है कि इस दिन की गई खरीदी अखंड समृद्धि प्रदान करती है।

भाग्य वृद्धि का सूचक

हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शर्मा शास्त्री के अनुसार अक्षय तृतीया को अक्षय तीज नाम से भी जाना जाता है। इसे भगवान विष्णु का दिन माना गया है। वैदिक ग्रंथ एवं पुराणों के अनुसार त्रेता युग का आरंभ अक्षय तृतीया के दिन से ही हुआ था। ज्योतिषाचार्य शर्मा बताते हैं कि अक्षय तृतीया को भाग्य में वृद्धि का सूचक भी माना गया है। इसीलिए इस दिन लोग सोना, स्वर्ण आभूषण और स्वर्ण मुद्राएं खरीदते हैं, ताकि उनकी समृद्धि आने वाले सालों में भी बनी रहे। लोगों का विश्वास है कि इस दिन खरीदे गए सोने पर पाप ग्रह की दृष्टि नहीं पड़ती।

16 साल बाद अदभुत संयोग

जालंधर के ज्योतिषाचार्य पंडित आदित्य प्रसाद शुक्ला के मुताबिक माह भर तिथियों का घटना-बढना लगा रहता है जबकि, अक्षय तृतीया पर सूर्य व चंद्र दोनों एक ही राशि में अपने चरम बिंदु पर होते हैं, जिससे इस दिन किए गए शुभ कार्य, खरीदारी, दान व पूजा का महत्व बढ़ जाता है। श्री हरि दर्शन मंदिर अशोक नगर के प्रमुख पुजारी पंडित प्रमोद शास्त्री बताते हैं कि अक्षय तृतीया पर इस बार 16 वर्ष बाद सूर्य, शुक्र, राहु व चंद्र उच्च राशि वृष में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही इसी दिन भगवान परशुराम का अवतार दिवस तथा त्रेता युग की शुरुआत का संयोग भी बन रहा है। ऐसा वर्ष संयोग वर्ष 2003 में बना था।

Dharm Desk : Legend News

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