Dust के प्रदूषण से बचायेंगे ये 5 योगासन

नई दिल्‍ली। राजधानी दिल्ली में Dust के कारण सांस लेना भी दूभर हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक 15 जून से लेकर 19 जून तक दिल्ली पंजाब, हरियाणा, जम्मु-कश्मीर, चंडीगढ़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछे एक इलाकों में Dust भरी आंधी के साथ तूफान चल सकता है, कई जगहों पर बिजली भी गिर सकती है। मौसम विभाग ने पीले रंग का अलर्ट जारी किया है जिसका मतलब है कि सचेत रहें।

हम घर से बाहर वायु की गुणवत्ता की निगरानी नहीं कर सकते, लेकिन घर के भीतर होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण रख सकते हैं। रसोई से निकलने वाला धुआं, अगरबत्ती, डिर्टजेट, पेंट के केमिकल से निकलने वाली गंध, फर्श साफ करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली फिनाइल, रूम फ्रेशनर, धूल, वायरस, बैक्टीरिया, सिगरेट से निकलने वाला धुआं ज्यादातर घरों में मौजूद रहता है, जिसमें लोग सांस लेने को मजबूर रहते हैं।

अगर आप इस Dust प्रदूषण से बचना चाहते हैंं, तो सुबह के समय योग करें। इससे आपको काफी लाभ मिलेगा। इससे आप कई बीमारियों से बचने के लिए फिट रहेंगे। जानिए रोजाना किन योगासनों को करने से आपको मिलेगा लाभ।

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम करने से आपके शरीर से मौजूद विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते है। साथ ही शरीर में एनर्जी और फेफड़े साफ होगे। इस आसन के लिए एक दरी या योगा मैट में पलथी मार कर बैठ जाएं। इसके बाद अपनी आंखे को बंद कर शांत होकर बैठ जाएं। ध्यान को सांस पर लाकर सांस की गति को अनुभव करें और अब इस क्रिया को शुरू करें। इसके लिए पेट के निचले हिस्से को अंदर की ओर खींचे व नाक से सांस को बल के साथ बाहर फेंके। यह प्रक्रिया बार-बार इसी प्रकार तब तक करते जाएं जब तक थकान न लगे। फिर पूरी सांस बाहर निकाल दें और सांस को सामान्य करके आराम से बैठ जाएं। कपालभाति के बाद मन शांत, सांस धीमी व शरीर स्थिर हो जाता है। इससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़कर रक्त शुद्ध होने लगता है।

सूर्यभेदी प्राणायाम
इस प्राणायाम के अभ्यास से दमा, वात, कफ रोगों का नाश होता है। इसके लिए सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। आंखें बंद रखें। बाएं हाथ को बाएं घुटने पर ष्ज्ञान मुद्रा में रखें, फिर दाएं हाथ की अनामिका से बाएं नासिका के छिद्र को दबाकर बंद करें। फिर दाई नासिका से जोर से श्वास अन्दर लें। अपनी क्षमता अनुसार श्वास रोकने का प्रयास करें। फिर दाएं नासिका के छिद्र को बन्द कर बाएं नासिका छिद्र से श्वास निकाले। प्रारम्भ में इसके कम से कम 10 चक्र करें और धीरे-धीरे जब आप अभ्यस्त हो जाएं तो इसके चक्र बढ़ा लें। शुरू-शुरू में अभ्यासी इस प्राणायाम को करते वक्त सिर्फ दाई नासिका से सांस लें और बाई नासिका से निकाले। सांस रोकने का अभ्यास न करें। इस प्राणायाम के अभ्यास से दमा, वात, कफ रोगों का नाश होता है।

बाह्य प्राणायाम
इस योगासन को करने से आपको ताजी सांस मिलेगी। इसके साथ ही आपका फेफड़ा से गंदी हवा बाहर निकल जाएंगी। साथ ही वह हेल्दी रहेगा। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले सामान्य स्थिति में बैठकर गहरी सांस लें। अब पूरी सांस को तीन बार रोकते हुए बाहर छोड़ें। शरीर से हवा पुश करने के लिए अपने पेट और डायाफ्राम का इस्तेमाल करें। लेकिन, ध्यान रखें श्वांस छोड़ना आपके लिए किसी भी स्थिति में असहज न रहे। अपनी ठोडी को अपने सीने से स्पर्श करें और अपने पेट को पूरी तरह से अंदर और थोड़ा ऊपर की ओर खींच लें।अपनी क्षमता के हिसाब से इस स्थिति में बैठे रहें। फिर अपनी ठोडी धीरे से ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे में सांस लें। फेफड़ों को पूरी तरह से हवा से भर लें। तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम
इस आसन को करने से दिल की बीमारियों के साथ-साथ ब्लड प्रेशर की बीमारी से भी काफी आराम मिलता है। यह बुहत ही प्रसिद्ध आसन है। इस आसन को करने के लिए नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक करे और बाद में इसका अभ्यास 10 मिनट तक करे। इस प्रणायाम को आप खुली हवा में बैठकर करे। रोज़ाना इस योग को करने से फेफड़े शक्तिशाली बनते है। इससे नाडिया शुद्ध होती है और शरीर स्वस्थ, कांतिमय और शक्तिशाली बनता है।

महाप्राण ध्वनि
हवा को संस्कृत में प्राण कहते हैं। इसी आधार पर कम हवा से उच्चरित ध्वनि ‘अल्पप्राण’ और अधिक हवा से उतपन्न ध्वनि ‘महाप्राण’ कही जाती है। प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण है। इसमें विसर्ग की तरह ‘ह’ की ध्वनि सुनाई पड़ती है। सभी उष्म वर्ण महाप्राण हैं। ‘हम्म्म्म’ मंत्र का उच्चारण करते हुए गहरी और लंबी श्वास लें और बाहर छोड़ें। इस मंत्र का उच्चारण करते हुए दस से पंद्रह मिनट तक यह आसन करें।

Dust प्रदूषण से बचना चाहते हैंं, तो सुबह के समय योग करें।

Health Desk : Legend News

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