घर को महकाने के साथ-साथ ठंडा भी रखते हैं ये फूल

इस बार मार्च से ही मई में होने वाली तपिश का अहसास होने लगा था। पारा अभी से 38 और 40 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे में गर्मियों में घर का तापमान सामान्य रखने के लिए घर के अंदर मौसमी पौध लगाना बेहतर ऑप्शन है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इन पौधों से घर न सिर्फ ठंडा रहता है बल्कि, उनकी खुशबू से वातावरण भी शुद्ध बना रहता है।
जैसमिन ग्रुप के फूल से महकाएं घर
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मी में जो लोग खुशबूदार और सफेद फूलों को घर में जगह देना चाहते हैं वह जैसमिन ग्रुप के फूलों को चुनें। इसमें बेला, चमेली, चंपा, मोगरा और जूही शामिल है। यह पौधे खुशबूदार होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर हैं और खुशबूदार फूलों की रेंज 25-30 रुपये से शुरू होती है।
सूरजमूखी
सूरजमुखी: सूरजमुखी का पौधा गर्मी में होने वाले सभी पौधे में सबसे गुणकारी पौधा है। साथ ही इसकी देखरेख करना भी आसान है। इसे बढ़ने के लिए 7-8 घंटे की धूप की जरूरत होती है। NBRI के वैज्ञानिक डॉ. आरएस कटियार ने बताया कि यह अस्थमा, कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है।
बेला
बेले का इस्तेमाल एरोमा थेरेपी में किया जाता है। साथ ही गर्मी में निकलने वाली फोड़े फुंसी, दाद, खुजली से निजात भी मिलती है।
चमेली
आयुर्वेद के मुताबिक चमेली के फूल से स्किन संबंधी बीमारियां दूर होती हैं। पेट के कीड़े मरते हैं। फूलों के रस से चेहरा चमकदार बनता है।
चंपा
चंपा के फूल अपनी खुशबू से स्ट्रेस लेवल को मेनटेन करते हैं। घर में लगाने से गर्मी के दिनों में ताजगी का एहसास देते हैं।
मोगरा
मोगरे का इत्र कान के दर्द में भी प्रयोग किया जाता हैं। कोढ़, मुंह और आंखों के रोगों में लाभ देता है।
जूही
इसकी भीनीभीनी खुशबू तन और मन को ठंडक का एहसास देती है।
कॉस्मॉस
कॉस्मॉस मौसमी पौधा है जो धूप की अच्छी रोशनी में खिलता है। इसके पत्ते फर्न की तरह होते हैं और फूल गुलबहार की तरह जो सफेद, गुलाबी, संतरी, मजेंटा और पीले रंगों में पाए जाते हैं। यह 7-10 दिनों में अंकुरित होता है। इसके लिए जमीन पर बीजों को फैला दीजिए और हलके से ढक दें।
पोर्टुलाका
यह गर्म और सूखी जमीन में होता है। यह रंग-बिरंगे सुंदर फूलों वाला पौधा है, जोकि घास की तरह जमीन पर फैलता है। यह पौधा किसी भी तरह की मिट्टी में लगाया जा सकता है। गमले में लगाने वाले लोग पौधे को खिली धूप में रखें और गमले में पानी का रुकने की व्यवस्था करें। इसे रोज-रोज पानी देने की जरूरत नहीं है।
-एजेंसियां

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