नारियल के तेल से फायदे और नुकसान को लेकर देशभर में बहस छिड़ी

हार्वर्ड विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर ने जब से नारियल के तेल को सेहत के लिए खतरनाक बताया है तब से नारियल के तेल के फायदे और नुकसान को लेकर देश भर में ब‍हस छिड़ गई है। विशेषकर दक्षिण भारत के लोगों में, जहां नारियल का तेल अधिक प्रयोग किया जाता है। उनका दावा है कि वे लोग कई साल से इसका प्रयोग कर रहे हैं और उनकी सेहत पर इसका कोई नुकसान नहीं हुआ। ट्विटर पर लोगों ने इस पर अपने-अपने कॉमेंट दिए हैं। केरल की मंजुला नायर ने प्रोफेसर का मजाक बनाते हुए ट्वीट किया है, ‘मेरे ग्रांड पैरंट्स करीब 100 साल तक जिए। वह तो हमेशा ही इस ‘जहर’ का प्रयोग अपने खाने में करते थे लेकिन उन्‍हें तो कुछ नहीं हुआ।’
वहीं जर्नलिस्‍ट लिज मैथ्‍यू ने इस बात को जोर देकर कहा है केरल में लोगों की औसत आयु दर काफी अधिक है। वहीं रोहिणी राम शशिधर का कहना है कि कर्नाटक में उनके घर में नारियल का तेल ही खाने इस्‍तेमाल होता है। लोगों की इस प्रकार की प्रतिक्रियाओं को देखकर एक बात तो तय है कि हार्वर्ड के प्रोफेसर के दावे के बाद इन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
भारत में ही नहीं अन्‍य देशों में भी प्रोफेसर के इस दावे को गलत बताया जा रहा है। ओरेगॉन के डॉक्‍टर एन चाइर्ल्‍ड का कहना है कि अगर नारियल तेल वाकई में जहर होता तो जो लोग हवाई, फिलीपीन्‍स और थाइलैंड में सालों से इसका प्रयोग कर रहे हैं, कब के मर चुके होते। यहां तक कि फिलीपींस कर रहने वाली जोजू पार्कर ने कहा है कि उनके होम टाउन के सभी लोगों को तो अभी तक मर जाना चाहिए था, क्‍योंकि वे लोग तो लगभग हर डिश में नारियल के तेल का प्रयोग करते हैं।
हालांकि कुछ डॉक्‍टर्स हैं तो हार्वर्ड के प्रोफेसर के दावे का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि नारियल के तेल में खराब कलेस्ट्रॉल यानी लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो कि दिल की बीमारियों को बढ़ावा देता है। फॉर्टिस सेंटर फॉर डायबीटीज के अध्‍यक्ष डॉक्‍टन अनूप मिश्रा ने बताया, ‘सच्‍चाई यह है कि 7 में 6 अध्‍ययनों में इस बात का दावा किया गया है कि नारियल के तेल में बहुत ही नुकसानदायक LDL कलेस्ट्रॉल होता है। हार्वर्ड के प्रोफेसर ने इस सच्‍चाई को थोड़ा सा डरावने तरीके से लोगों को बताया है।’
वहीं मैक्‍स अस्‍पताल के इंडोक्राइनोलॉजी के प्रोफेसर डॉक्‍टर सुधीर झा ने भी नारियल के तेल में खराब कलेस्‍ट्रॉल होने की बात कही है।
पिछले साल अमेरिकन हर्ट एसोसिएशन एडवाइजरी जारी करके लोगों से नारियल तेल से दूर रहने की सलाह दी थी। इसमें बताया गया था कि नारियल के तेल और अन्‍य खाद्य तेलों के बारे में हम कोई तुलना नहीं कर रहे हैं मगर नारियल तेल में उपस्थित अत्‍यधिक मात्रा में LDL कलेस्ट्रॉल के कारण लोगों का इससे दूर रहने में ही समझदारी है। यह दिल के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदायक है।
वहीं न्यूट्रिशनिस्‍ट ईशी खोसला के पास लोगों के सवालों की झड़ी लग गई है। उनका कहना है, ‘मुझे समझ में नहीं आ रहा कि हार्वर्ड के एक प्रोफेसर के दावे के बाद लोग इस प्रकार के क्‍यों सवाल कर रहे हैं। यहां हमें अपने कॉमन सेंस का भी इस्‍तेमाल करना चाहिए। अगर कोई ऑलिव ऑइल को नुकसानदायक बता देगा तो क्‍या इटली के लोग इसे खाना बंद कर देंगे। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर नारियल के तेल में LDL होता है तो यह काफी मात्रा में HDL यानी हाइ डेंसिटी लिपोप्रोटींस भी तो पैदा करता है, जो कि अच्‍छा कलेस्‍ट्रॉल माना जाता है। इसके अलावा नारियल के तेल से पाचन तंत्र मजबूत होने के साथ ही प्रतिरक्षा तंत्र में भी सुधार आता है।’
वहीं एम्‍स के गैस्‍ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के प्रफेसर डॉक्‍टर उमेश कपिल का मानना है, ‘औसतन हर व्‍यक्ति को रोजाना 2 हजार कैलरी की आवश्‍यकता होती है। जिसमें से 20 फीसदी फैट से मिलना चाहिए। इसके लिए गुड कलेस्‍ट्रॉल या बैड कलेस्‍ट्रॉल कोई खास भूमिका नहीं निभाता। हमें जरूरत है तो रोजना सिर्फ पोषक आहार लेने की।’
-एजेंसियां

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