दुनिया का सबसे ताकतवर Apache वायुसेना के बेड़े में शामिल

पठानकोट। दुनिया का सबसे ताकतवर और जबर्दस्‍त मारक क्षमता वाला हेलिकॉप्टर Apache आज वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया। इससे भारतीय एयरफोर्स ने दुश्मन को हवा में मार गिराने की अपनी ताकत में और इजाफा किया है।
एयरफोर्स के चीफ बीएस धनोआ की मौजूदगी में पठानकोट एयरबेस पर 8 AH-64E Apache हेलिकॉप्टरों को एयरफोर्स में शामिल किया गया। पानी की बौछारों से सलामी देकर एयरक्राफ्ट्स को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। अमेरिकी वायुसेना के इन हेलिकॉप्टर्स को अटैक के मामले में दुनिया में सबसे ताकतवर माना जाता है।
भारतीय वायुसेना ने बोइंग कंपनी से 22 Apache हेलिकॉप्टर्स की खरीद के लिए करार किया है, जिसके पहली खेप के तौर पर ये 8 हेलिकॉप्टर वायुसेना का हिस्सा बने हैं। मिराज, सुखोई, तेजस और मिग सीरीज के एयरक्राफ्ट्स से सजी भारतीय वायुसेना को इससे पड़ोसी दुश्मन देश से हवा में निपटने में निर्णायक बढ़त मिल सकेगी। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ जंग में इनका इस्तेमाल किया था।
दुनिया में सबसे मारक है Apache
Apache हेलिकॉप्टरों को अटैक के मामले में दुनिया में सबसे मारक माना जाता है। 2020 तक भारतीय वायुसेना को सभी 22 Apache अटैक हेलिकॉप्टर मिल जाएंगे। मई 2019 में अमेरिकी कंपनी बोइंग ने भारत को एरिजोना में पहला Apache हेलिकॉप्टर सौंपा था।
20 हजार फीट तक भर सकता है उड़ान
इससे भारत की दुश्मन के घर में घुसकर मारने की क्षमता बढ़ी है। अपाचे को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) समेत अन्य इलाकों में आतंकी ठिकानों पर हमले में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 20 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है।
मल्टी रोल युद्धक हेलिकॉप्टर के रूप में पहचान
अमेरिकी कंपनी का AH-64 Apache दुनिया भर में मल्टी रोल युद्धक हेलिकॉप्टर के तौर पर जाना जाता है। इसे लंबे समय से अमेरिकी सेना में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल करने वाले देशों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दुनिया भर में कंपनी ने अब तक 2,100 अपाचे हेलिकॉप्टर्स की सप्लाई की है।
एयरफोर्स में सुखोई MI-35 की लेगा जगह
बोइंग AH-64E अमेरिकी सेना और अन्य अंतर्राष्ट्रीय डिफेंस फोर्सेज के लिए सबसे अडवांस्ड लड़ाकू हेलिकॉप्टर है जोकि एक साथ कई कार्य करने में सक्षम है। अपाचे पहला ऐसा हेलिकॉप्‍टर है जो भारतीय सेना में विशुद्ध रूप से हमले करने का काम करेगा। भारतीय सेना रूस निर्मित सुखोई एमआई-35 का इस्‍तेमाल वर्षों से कर रही है, लेकिन यह अब रिटायरमेंट के कगार पर है।
हर मौसम में करेगा मार, युद्ध में साबित हो सकता है गेमचेंजर
Apache को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दुश्‍मन की किलेबंदी को भेदकर और उसकी सीमा में घुसकर हमला करने में सक्षम है। रक्षा विश्‍लेषकों का मानना है कि अपाचे युद्ध के समय ‘गेम चेंजर’ की भूमिका निभा सकता है। किसी भी तरह का मौसम हो, किसी भी तरह की परिस्थिति हो, अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर दुश्मनों को नहीं बख्शता।
इजरायल भी करता रहा है इस्तेमाल
अमेरिका ने Apache अटैक हेलिकॉप्टर को पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ दुश्मनों से लोहा लेने में इस्तेमाल किया। इजरायल भी लेबनान और गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों में इसी अटैक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करता रहा है। इजिप्ट और नीदरलैंड की सेनाएं भी इस अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती हैं।
रात के अंधेरे में भी दुश्मन पर करता है मार
Apache अटैक हेलिकॉप्टर में दो जनरल इलेक्ट्रिक T700 टर्बोशैफ्ट इंजन हैं और आगे की तरफ एक सेंसर फिट है जिसकी वजह से यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसका वजन 5,165 किलोग्राम है और इसमें पायलटों के बैठने के लिए दो सीटें होती हैं। इस हेलिकॉप्टर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र की हर परिस्थिति में टिका रह सके।
तेज है मार, मुश्किल है दुश्मन का बच निकलना
यह 365 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। इतनी तेज गति होने की वजह से यह दुश्मन के टैंकों के परखच्चे आसानी से उड़ा सकता है। Apache अटैक हेलिकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगी हैं और दोनों तरफ 30mm की दो गनें हैं। इन मिसाइलों का पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरा होता है कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है।
मौजूद हैं कई जोरदार फीचर
Apache हेलिकॉप्टर का सबसे क्रांतिकारी फीचर है इसका हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटिग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम (Integrated Helmet and Display Sighting System), जिसकी मदद से पायलट हेलिकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक M230 चेन गन को अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है।
अमेरिका से भारत तक का तय किया सफर
इस हेलिकॉप्टर को अमेरिकी सेना के अडवांस्ड अटैक हेलिकॉप्टर प्रोग्राम के लिए बनाया गया था। इसने पहली उड़ान साल 1975 में भरी, लेकिन इसे अमेरिकी सेना में साल 1986 में शामिल किया गया।
-एजेंसियां

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